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बिलासपुर डीईओ पर गबन और अवैध वसूली के आरोपों के बीच जांच केवल अनुकंपा नियुक्ति तक सीमित
बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय एक बार फिर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों से घिर गया है। डीईओ विजय टांडे और कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील यादव पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे हैं, जिसकी गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा संभाग बिलासपुर ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। हालांकि, जांच के दायरे को लेकर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि करोड़ों के गबन और अवैध वसूली की शिकायतों के बीच जेडी ने फिलहाल केवल अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच के ही निर्देश दिए हैं।

वित्तीय अनियमितता और गबन का बड़ा मामला
शिकायतों के अनुसार, विजय टांडे के कोटा बीईओ रहने के दौरान भृत्य देवेंद्र कुमार पालके को नियम विरुद्ध तरीके से 4,95,420 रुपये का वेतन भुगतान और 3,54,000 रुपये का धुलाई भत्ता दिया गया। आरोप है कि टांडे ने भृत्य को गोपनीय 'मेकर' और 'चेकर' आईडी सौंप रखी थी, जिसके जरिए सरकारी खजाने से लाखों रुपये आहरित किए गए। इस मामले में वरिष्ठ कोषालय अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर टांडे के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की जा चुकी है और कोटा थाने में प्राथमिकी दर्ज है, किंतु अब तक उत्तरदायी अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी है।
जांच समिति के गठन पर विवाद
जेडी आर.पी. आदित्य ने 6 मार्च को आदेश जारी कर जांजगीर-चांपा डीईओ अशोक सिन्हा की अगुवाई में जे.के. शास्त्री और बीईओ बिल्हा भूपेंद्र कौशिक की समिति बनाई है। शिकायतकर्ता अंकित गौरहा ने इस टीम में भूपेंद्र कौशिक की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि इससे पूर्व एक महिला द्वारा पति के बकाया वेतन के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत की जांच में इसी टीम ने टांडे को क्लीन चिट दी थी। ऐसे में निष्पक्ष जांच पर संशय व्यक्त किया जा रहा है।
अवैध वसूली और नियुक्तियों में खेल
डीईओ और कनिष्ठ लेखा परीक्षक पर लगे आरोपों की सूची लंबी है:
- ऑफिस अटैचमेंट के नाम पर शिक्षकों से प्रति माह 2 से 10 हजार रुपये की मांग।
- 10 लाख रुपये लेकर दूसरी पत्नी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने और पति-पत्नी दोनों के शासकीय सेवा में होने के बावजूद फर्जी शपथ पत्र पर नौकरी देने का आरोप।
- भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले कर्मचारियों को निलंबित करना और पदोन्नति के बदले मोटी रकम की मांग करना।
लिपिक के खिलाफ भी जांच शुरू
विवादों के बीच डीईओ विजय टांडे ने भी कार्रवाई करते हुए सहायक ग्रेड-2 विकास तिवारी के खिलाफ जांच बिठा दी है। कलेक्टर कार्यालय से मिली शिकायत का हवाला देते हुए डीईओ ने तिवारी पर फर्जी तरीके से अनुकंपा नियुक्ति दिलाने का आरोप लगाया है और 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुझ तक इससे पहले कोई अन्य शिकायत नहीं पहुंची थी। वर्तमान में अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में मिली शिकायतों के आधार पर जांच कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
आर.पी. आदित्य, संयुक्त संचालक (शिक्षा), बिलासपुर संभाग
वर्तमान में जांच टीम को 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्ट अभिमत और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। ज्ञात होगी इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने ने संयुक्त संचालक से शिकायत की थी। उनकी शिकायत को आधार बनाते हुए संयुक्त संचालक ने जांच टीम गठित की है।

अनुकंपा नियुक्ति, युक्तियुक्तकरण, अटैचमेंट और पदोन्नति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार की जानकारी मिलने पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है, ताकि विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
— अंकित गौराहा पूर्व जिला पंचायत सदस्य
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
