17 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले FIR के बाद अफसरों के बदले सुर  आईजी-एसएसपी को पत्र लिख मांगा विधिक संरक्षण; सवाल- सालों तक कैसे निकलती रही सरकारी रकम?

17 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले FIR के बाद अफसरों के बदले सुर  आईजी-एसएसपी को पत्र लिख मांगा विधिक संरक्षण; सवाल- सालों तक कैसे निकलती रही सरकारी रकम?

बिलासपुर। सर्पदंश से मौत पर मिलने वाली चार-चार लाख रुपए की प्राकृतिक आपदा सहायता राशि के घोटाले में अब नया मोड़ आ गया है। 17 करोड़ रुपए के इस बड़े घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं। जिन राजस्व न्यायालय के आदेशों पर सालों तक सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए का भुगतान होता रहा, अब उन्हीं आदेशों की सील और हस्ताक्षर को फर्जी बताया जा रहा है। मामले में थानों के अंदर एफआईआर दर्ज होने के बाद अधिकारियों के सुर अचानक बदल गए हैं। तहसीलदार ने आईजी और एसएसपी को एक संशोधित ज्ञापन भेजा है, जिसमें खुद को विधिक संरक्षण देते हुए सारा दोष न्यायालय के साथ छल करने वाले जालसाजों पर मढ़ा गया है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह सब खुद को बचाने की कोई कवायद है?

एफआईआर के बाद अधिकारियों के कान में बजने लगा सायरन....

कोनी, तोरवा, सरकंडा, सिविल लाइन और सिरगिट्टी थानों में इस मामले को लेकर अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों ने बकायदा एक गिरोह बनाकर फर्जी मर्ग रिपोर्ट, जाली सील, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और झूठे शपथ पत्रों का इस्तेमाल कर प्राकृतिक आपदा राहत राशि मंजूर करा ली थी। इन मामलों के दर्ज होने के बाद राजस्व अधिकारियों ने अपना सुर बदला है। तहसीलदार ने पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि न्यायालय के साथ कूटरचना करने वाले आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 227 से 231 (मिथ्या साक्ष्य गढ़ने) सहित अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।

Read More कर्मचारियों के नाम पर 172 करोड़ की हेराफेरी: पूर्व आबकारी एमडी त्रिपाठी गिरफ्तार, 20 जुलाई तक रिमांड पर; रामगोपाल अग्रवाल से होगी पूछताछ

विधिक संरक्षण का दिया हवाला, कहा- हम पर नहीं बनती कार्रवाई

Read More सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद भी महकमे लाचार: फर्जी दिव्यांगता और बोगस डिग्री से 127 कर रहे सरकारी नौकरी, आदेश के बाद भी फाइलों में दबी कार्रवाई

अपने बचाव में तहसीलदार ने ज्ञापन के अंदर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा-31 का जिक्र किया है। उनका कहना है कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करते हैं। आरबीसी 6-4 के तहत समय-सीमा तय होने के कारण पीठासीन अधिकारियों ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आई सत्यापित मर्ग व पीएम रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए आदेश पारित किए थे। ज्ञापन में न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम, 1985 और उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि न्यायिक दायित्व के तहत पारित आदेशों के लिए पीठासीन अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।

लेकिन अनसुलझे सवाल यह हैं...

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दस्तावेज, हस्ताक्षर और सील सब फर्जी थे, तो यह खेल सालों तक राजस्व न्यायालय और प्रशासनिक व्यवस्था की नजर से कैसे बचा रहा?

 बिना सत्यापन कैसे हुआ करोड़ों का भुगतान:

सहायता राशि जारी करने से पहले पटवारी, आरआई और तहसीलदार के स्तर पर जांच होती है। क्या 17 करोड़ रुपए जैसी बड़ी राशि बिना किसी जमीनी सत्यापन के बंट गई?

 क्या सिर्फ बाहरी गिरोह शामिल है:

 जिन आदेशों के आधार पर वर्षों तक सरकारी पैसा निकला, क्या उसमें सिस्टम के भीतर बैठे किसी भी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं थी?

 अब क्यों जागी व्यवस्था:

 जब तक पुलिस थानों में मामला दर्ज होना शुरू नहीं हुआ, तब तक राजस्व विभाग ने खुद अपनी जाली सील और फर्जी आदेशों की पहचान क्यों नहीं की?

अब तहसीलदार ने पुलिस से जांच का फोकस वास्तविक कूटरचना करने वाले आरोपियों पर केंद्रित करने को कहा है। पुलिस की जांच आगे किस दिशा में जाती है और क्या इस फर्जीवाड़े में सिर्फ बाहरी लोगों पर ही गाज गिरेगी, यह आने वाले वक्त में साफ होगा  फिलहाल मामले में SIT और ईओडब्लू से जांच करवाने की कि मांग तेज हुई है।

Tags:

Latest News

Raipur Stone Pelting Row: FIR के विरोध में थाने के बाहर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, 15 घंटे से धरने पर डटे नेता; केस वापस लेने की मांग Raipur Stone Pelting Row: FIR के विरोध में थाने के बाहर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, 15 घंटे से धरने पर डटे नेता; केस वापस लेने की मांग
CM साय का बड़ा बयान: UCC पर दिया बड़ा संकेत, पेपर लीक पर दोहराई सख्ती; कांग्रेस के धरने पर भी साधा निशाना
Jashpur POCSO Case: रिश्तों को शर्मसार करने वाले पिता को उम्रकैद, 13 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म मामले में जशपुर कोर्ट का बड़ा फैसला
पेपर लीक आंदोलन में नया मोड़: सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, राहुल गांधी मैदान में; आज CJP का देशव्यापी प्रदर्शन
Xiaomi का नया 20,000mAh Power Bank लॉन्च! 67W फास्ट चार्जिंग के साथ फोन ही नहीं, लैपटॉप भी होगा चार्ज
पीरियड्स में ठंडा पानी पीना सही या गलत? जानिए क्या है सच, एक्सपर्ट ने तोड़ा बड़ा मिथक
भिलाई में 57 टन स्टील चोरी या इंश्योरेंस का खेल? टैक्स बचाने कंपनी संचालक पर ही फर्जी FIR दर्ज कराने का शक
छग के 8 बड़े घोटाले: कोर्ट के फैसले पर टिका 5378 करोड़ की संपत्तियों का भविष्य, जानिए क्या है कानूनी प्रक्रिया
17 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले FIR के बाद अफसरों के बदले सुर  आईजी-एसएसपी को पत्र लिख मांगा विधिक संरक्षण; सवाल- सालों तक कैसे निकलती रही सरकारी रकम?
Sawan 2026: सावन में इन शुभ तिथियों पर करें रुद्राभिषेक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिल सकता है शिव कृपा का आशीर्वाद
पीब्ल्यूडी की अनदेखी का नतीजा: उपनिदेशक अभियोजन के कक्ष की सीलिंग गिरी, बाल-बाल बचे अधिकारी-कर्मचारी
CJP Protest: जंतर-मंतर हिंसा से संगठन ने बनाई दूरी, बोला- 'तोड़फोड़ करने वाले हमारे समर्थक नहीं'; असामाजिक तत्वों की घुसपैठ का लगाया आरोप