प्रशासन को ठेंगा: मगरपारा में बिना रेरा 22 टुकड़ों में बंटी नजूल जमीन, अधिकारी बोले अब हर प्लॉट की होगी जांच

प्रशासन को ठेंगा: मगरपारा में बिना रेरा 22 टुकड़ों में बंटी नजूल जमीन, अधिकारी बोले अब हर प्लॉट की होगी जांच

बिलासपुर। जिले में प्रशासन अवैध प्लॉटिंग को लेकर लगाम कसने की बात कह रहा है, मगर ग्राउंड जीरो पर इसकी सच्चाई बिल्कुल विपरीत नजर आती है। शहर के हृदय स्थल पर कॉलोनाइजर खुलेआम प्लॉटिंग का खेल बिना किसी डर के जारी हैं। इसकी सबसे ताजा उदाहरण मगरपारा स्थित खसरा नंबर 15/1 की नजूल भूमि पर देखने को मिला है। यहां भू-स्वामी माया नागदौने और अन्य ने बिना रेरा की मंजूरी लिए ही पूरी जमीन को 22 छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया। हद तो यह है कि कॉलोनाइजर ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से लेआउट पास कराने की जहमत भी नहीं उठाई।

अब इस पूरे मामले में राजस्व अधिकारी कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। नजूल न्यायालय से इन प्लॉट का नामांतरण कराने का प्रयास सामने आने के बाद विभागीय अमला अचानक हरकत में आया है। अधिकारियों ने तय किया है कि 15/1 की जमीन के हर टुकड़े की अब जांच होगी।

 

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बिना रेरा और लेआउट नहीं बिकेगी जमीन

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राजस्व विभाग इस बार भू-माफियाओ पर शिकंजा कसने में कोई भी चूक नहीं करना चाहता, जिससे उन्हें बच निकलने का कोई नया रास्ता मिले। मामले की सिलसिलेवार पड़ताल में सबसे पहले यह देखा जाएगा कि जमीन के 22 टुकड़ों के बटांकन की वैधानिक प्रक्रिया नियम के मुताबिक पूरी की गई है या फिर कागजों में हेरफेर हुआ है। शुरुआती दो-तीन मामलों की पड़ताल में ही यह बात सामने आ चुकी है कि कॉलोनाइजर ने रेरा से अनुमति लेना जरूरी ही नहीं समझा। लेआउट पास कराए बिना ही धड़ल्ले से जमीन पर अवैध प्लॉटिंग कर दी गई। ऐसे में अब बिना रेरा और लेआउट के 15/1 की जमीन का कोई भी टुकड़ा बेचना मुमकिन नहीं होगा।

 

निगम का दायरा तो बढ़ा, लेकिन सर्वे का कुछ पता नहीं

 

शहर के बीच इतने बड़े पैमाने पर हो रही अवैध प्लाटिंग से विभागीय अमले में हड़कंप मचा हुआ है। दूसरी तरफ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी कम दिलचस्प नहीं है। करीब पांच साल पहले शहर से लगे आसपास के तमाम गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया था। निगम में नए क्षेत्र शामिल होने के बाद नए सिरे से परिसीमन बेहद जरूरी था, लेकिन इतने सालों बाद भी सर्वे का काम शुरू ही नहीं हुआ है। इस भारी लापरवाही का नतीजा यह है कि वर्तमान में नजूल की कुल कितनी जमीन शहर में मौजूद है, यह राजस्व विभाग को भी स्पष्ट रूप से नहीं पता।

 

जवाब आने के बाद होगी आगे की जांच 

 

नजूल न्यायालय ने फिलहाल मामले को संज्ञान में लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस थमा दिया है। उन्हें अपना जवाब देने के लिए मात्र सात दिन का समय दिया गया है। जैसे ही उनका जवाब मिलेगा, उसके बाद ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया और आगे की जांच की जाएगी।

 

नारायण गबेल नजूल अधिकारी बिलासपुर 

 

 

 

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