मानहानि मामले में वन अधिकारी को हाई कोर्ट से राहत, कार्यवाही पर रोक

मानहानि मामले में वन अधिकारी को हाई कोर्ट से राहत, कार्यवाही पर रोक

बिलासपुर : बिलासपुर हाई कोर्ट ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और वर्तमान सीसीएफ बिलासपुर सर्किल मनोज कुमार पांडेय के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस एन के व्यास की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जिस आदेश के आधार पर मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है, वह अधिकारी ने अपने शासकीय पद और कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जारी किया था।

मामला उस समय का है, जब मनोज कुमार पांडेय रायगढ़ में डीएफओ के पद पर पदस्थ थे। उन्होंने अनुबंध की कुछ शर्तों का पालन नहीं करने पर निशांत कुमार अग्रवाल की कंपनी एपेक्स एसोसिएट्स को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया था। इसके बाद कंपनी संचालक ने अधिकारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि की शिकायत अदालत में दर्ज कराई। अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आपराधिक प्रकरण की कार्यवाही शुरू कर दी थी।

सरकारी काम के दौरान जारी हुआ था आदेश

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वन अधिकारी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से अधिवक्ता मनुराज सिंह ने दलील दी कि ब्लैकलिस्ट करने का आदेश अधिकारी ने अपने निजी स्तर पर नहीं, बल्कि सरकारी पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया था। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक शिकायत पर आगे की कार्रवाई से पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

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कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना जरूरी है अनुमति

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 499 और 500 के तहत दर्ज शिकायत जिस आदेश पर आधारित है, वह अधिकारी ने अपनी आधिकारिक क्षमता में पारित किया था। ऐसे में प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति लेना जरूरी है।

कोर्ट ने इसी आधार पर वन अधिकारी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

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