ओणम पर सजा केरल, फूलों की रंगोली से लेकर ओणसद्या तक दिखी उत्सव की रंगत
केरल : आज केरल समेत देश के कई हिस्सों में ओणम का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। घरों के आंगन में फूलों से बनी रंगोली यानी पुक्कलम सजाई गई है। मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष आयोजन हो रहे हैं, वहीं परिवारों में पारंपरिक ओणसद्या की तैयारियां भी देखने को मिल रही हैं। केरल की गलियों में लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और उत्सव का रंग नजर आ रहा है।
ओणम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, कृषि परंपरा, प्रकृति और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है। करीब दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का सबसे प्रमुख दिन तिरुवोनम माना जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार के साथ पर्व की खुशियां मनाते हैं।
राजा महाबली के स्वागत की मान्यता
ओणम की सबसे प्रसिद्ध मान्यता राजा महाबली से जुड़ी है। कहा जाता है कि उनके शासनकाल में केरल में सुख, समृद्धि और समानता का वातावरण था। प्रजा अपने राजा से बेहद प्रेम करती थी। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर महाबली से तीन पग भूमि मांगी थी। महाबली ने अपनी दानशीलता के अनुरूप उनकी मांग स्वीकार कर ली। वामन ने दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिया थे। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा तो महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। उनकी दानशीलता और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दी। इसी मान्यता के चलते ओणम को राजा महाबली के स्वागत का पर्व भी माना जाता है।
फूलों की पुक्कलम से सजे घर-आंगन
ओणम पर घरों के सामने बनाई जाने वाली फूलों की रंगोली पुक्कलम पर्व की खास पहचान है। आज तिरुवोनम के मौके पर अलग-अलग रंगों और फूलों से सजी पुक्कलम लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। बच्चे और महिलाएं विशेष उत्साह के साथ पुक्कलम तैयार करते हैं।
केले के पत्ते पर सजी ओणसद्या
ओणम के दिन पारंपरिक भोज ओणसद्या का विशेष महत्व है। केले के पत्ते पर कई तरह के शाकाहारी व्यंजन परोसे जाते हैं। सब्जियों, दाल, अचार, पापड़ और अन्य पारंपरिक पकवानों के साथ भोजन के अंत में पायसम परोसा जाता है। परिवार और रिश्तेदार एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यही सामूहिकता ओणम को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला उत्सव बनाती है।
नौका दौड़ और लोक संस्कृति का रंग
ओणम के अवसर पर केरल की पारंपरिक नौका दौड़ वल्लमकली भी आकर्षण का केंद्र रहती है। लंबी सांप जैसी नौकाओं में सवार नाविक तालमेल के साथ दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा कथकली, मोहिनीअट्टम, पुलिकली और तिरुवातिरा जैसे पारंपरिक कला रूप भी ओणम के उत्सव में चार चांद लगाते हैं।
खेती और समृद्धि से भी जुड़ा पर्व
ओणम को फसल उत्सव के रूप में भी देखा जाता है। नई फसल के आगमन और अच्छी उपज के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा इस पर्व से जुड़ी है। इसलिए ओणम किसानों और ग्रामीण जीवन के लिए भी विशेष महत्व रखता है। यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और आने वाले समय में खुशहाली की कामना का संदेश देता है।
भाईचारे और सद्भाव का संदेश
ओणम की खासियत यह है कि इसे अलग-अलग समुदायों के लोग मिलकर मनाते हैं। घरों की सजावट, सामूहिक भोज और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। राजा महाबली की कथा से जुड़ी समानता और खुशहाली की कल्पना आज भी इस पर्व के मूल संदेश में दिखाई देती है।
आज ओणम के मौके पर केरल में उत्सव का माहौल है। फूलों से सजे घर, पारंपरिक परिधानों में नजर आते लोग, केले के पत्ते पर सजी दावत और लोक कलाओं की प्रस्तुति राज्य की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखा रही है। बदलते समय के बावजूद ओणम अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए है।
