सुशासन को पटरी से उतारने की बड़ी साजिश: गृहमंत्री और अफसरों के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा झूठ का जाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार की बढ़ती सक्रियता और नक्सलवाद पर कड़े प्रहार के बीच अब सरकार को बदनाम करने का एक नया खेल शुरू हो गया है। पिछले कुछ दिनों से गृहमंत्री विजय शर्मा और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निशाने पर लेकर सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही हैं। जानकार बताते हैं कि यह सब एक सोची-समझी साजिश है ताकि प्रशासन का मनोबल गिराया जा सके। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस दुष्प्रचार के पीछे असली चेहरा किसका है और किसे सरकार की साफ-सुथरी छवि से डर लग रहा है?

बदनाम पोर्टल्स के जरिए रची जा रही साजिश

जानकारों का कहना है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था के बारे में गलत और भ्रामक समाचार फैलाने का काम कुछ ऐसे मीडिया पोर्टल कर रहे हैं जो अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। ये पोर्टल केवल अपने निजी स्वार्थ और हित साधने के लिए बदनाम हैं। इन मीडिया पोर्टल के खिलाफ पहले से ही कई फर्जी खबरों के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मानहानि के केस चल रहे हैं और कुछ मामलों में तो सजा भी हो चुकी है। इसके बावजूद ये पोर्टल किसी बड़े षड्यंत्रकारी के हाथों की कठपुतली बनकर सरकार को अस्थिर करने का काम कर रहे हैं।

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जिम्मेदारी तय हुई तो तिलमिलाए षड्यंत्रकारी

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जिन प्रकरणों के जरिए पुलिस की असफलता का ढिंढोरा पीटा जा रहा है असल में वहां सरकार ने खुद कड़े कदम उठाए हैं। बलौदाबाजार की आगजनी हो या कांकेर की कानून व्यवस्था और तमनार की अमानवीय घटना। ये घटनाएं बेशक दुर्भाग्यपूर्ण थीं लेकिन सरकार ने इन्हें संज्ञान में लेकर फौरन जिम्मेदारी तय की। वहां तो योग्य अधिकारी पदस्थ थे फिर भी चूक हुई तो उन पर गाज गिरी। अब इसी पारदर्शिता को कमजोरी बताकर पेश किया जा रहा है। जबकि रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और जशपुर जैसे जिलों में पुलिस और प्रशासन की टीम बेहतरीन समन्वय के साथ काम कर रही है। कुछ विधर्मियों को इन जिलों में गड़बड़ी फैलाने का मौका नहीं मिल पा रहा है इसलिए वे भ्रामक खबरें फैला रहे हैं।

अफसरों के बीच दरार पैदा करने का गंदा खेल

प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी जहर घोला जा रहा है। यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि राज्य सेवा के अफसरों को प्रमोट कर जानबूझकर तवज्जो दी जा रही है। सच तो यह है कि सरकार केवल योग्य ऑफिसर को जिले की कमान देती है चाहे वह किसी भी सेवा से आया हो। अखिल भारतीय सेवा में आने के दो ही रास्ते हैं। एक अपनी मेहनत से यूपीएससी पास करना और दूसरा राज्य प्रशासनिक सेवा में 20 से 25 साल कड़ी मेहनत कर प्रमोशन पाना। दोनों ही रास्तों से आए अधिकारी समान रूप से सक्षम हैं। इस तरह अधिकारियों के बीच फूट डालने वाली साजिश की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए क्योंकि इससे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में भारी आक्रोश है।

मुंगेली की खुदकुशी को बताया बिलासपुर का हत्याकांड

झूठ का आलम यह है कि मुंगेली जिले के बामपारा निवासी युवक नरेश साहू की आत्महत्या के मामले को बिलासपुर का हत्याकांड बताकर वायरल किया गया। युवक ने एक मुस्लिम व्यक्ति की प्रताड़ना से तंग आकर जान दी थी जिस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। लेकिन साजिशकर्ताओं ने इसे सरकार का फेलियर बताने के लिए तथ्यों को ही तोड़-मरोड़ दिया। इसी तरह डीएसपी कल्पना वर्मा के मामले में भी दीपक टंडन नाम के व्यक्ति को शह दी जा रही है जिसके खिलाफ पहले से ही कई धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। टंडन जैसे दागी व्यक्ति का सहारा लेकर पुलिस विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।

वर्दी का मनोबल गिराने की कोशिश

पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह निराधार हैं और विभाग में कामकाज तय नियमों से हो रहा है। जब भी किसी ईमानदार अफसर या मंत्री पर बिना सबूत के कीचड़ उछाला जाता है तो इसका सीधा असर ग्राउंड पर काम करने वाले जवानों के मनोबल पर पड़ता है। रायगढ़ में वर्दी फटने के बाद भी संयम रखने वाली महिला कॉन्स्टेबल हो या बस्तर के दुर्गम इलाकों में तैनात जवान इन भ्रामक खबरों से उनका विश्वास डगमगाता है। जनता को यह समझने की जरूरत है कि वायरल हो रहा हर मैसेज सच नहीं होता और इन साजिशों के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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