Raipur की अनोखी होली: यहां होलिका के प्रेमी इलोजी की निकलती है बारात, 200 साल पुरानी आस्था से जुड़ी अनोखी परंपरा

Raipur की अनोखी होली: यहां होलिका के प्रेमी इलोजी की निकलती है बारात, 200 साल पुरानी आस्था से जुड़ी अनोखी परंपरा

रायपुर: रंगों के पर्व Holi के अवसर पर जहां देशभर में होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है, वहीं राजधानी Raipur में एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा आज भी जीवित है। यहां होलिका दहन के दिन होलिका के प्रेमी माने जाने वाले इलोजी की बारात निकाली जाती है, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक जुटते हैं। करीब दो शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी सदर बाजार क्षेत्र में पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

सेठ नाथूराम के रूप में होती है इलोजी की पूजा
सदर बाजार के व्यापारी समुदाय द्वारा सेठ नाथूराम के रूप में इलोजी की पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इलोजी को प्रेम और समर्पण का प्रतीक देवता माना जाता है। हर वर्ष होलिका दहन के अवसर पर उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और दूल्हे के स्वरूप में सजी प्रतिमा की भव्य बारात निकाली जाती है।

संतान सुख की कामना से करती हैं महिलाएं पूजा
धार्मिक विश्वास है कि निसंतान महिलाएं इलोजी की श्रद्धा से पूजा करने पर संतान सुख प्राप्त करती हैं। यही कारण है कि होली के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पहुंचकर मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करती हैं। राजस्थान की लोक परंपराओं से जुड़ी यह आस्था रायपुर में भी गहराई से स्थापित हो चुकी है।image-92_1772422973

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प्रेम कथा से जुड़ी लोक मान्यता
लोककथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका का विवाह इलोजी से होने वाला था और दोनों एक-दूसरे से गहरा प्रेम करते थे। लेकिन प्रह्लाद को अग्नि में जलाने की घटना के दौरान होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गईं। कहा जाता है कि होलिका की मृत्यु का समाचार मिलने पर इलोजी दूल्हे के वेश में बारात लेकर पहुंचे और शोक में डूब गए। उन्होंने होलिका की राख को अपने शरीर पर लगाकर आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया। इसी प्रेम और समर्पण की स्मृति में यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।

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धूमधाम से निकलती है प्रतीकात्मक बारात
होलिका दहन से पूर्व एकादशी से शुरू होने वाला यह आयोजन पूर्णिमा तक चलता है। इस दौरान पूजा, भजन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। होलिका दहन के दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इलोजी की बारात निकाली जाती है, जिसमें विवाह समारोह की तरह भोजन और प्रसाद की व्यवस्था भी की जाती है।

पीढ़ियों से संरक्षित सांस्कृतिक विरासत
बताया जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत लगभग 200 वर्ष पूर्व रायपुर के सराफा व्यापारियों और नाहटा परिवार द्वारा की गई थी। वर्तमान में यहां इलोजी (सेठ नाथूराम) की दो प्रतिमाएं स्थापित हैं, एक लगभग 200 वर्ष पुरानी और दूसरी करीब 50 वर्ष पुरानी। इस आयोजन का संचालन शाकद्विपीय ब्राह्मण समाज, पुष्टिकर समाज एवं रायपुर सर्राफा एसोसिएशन के सहयोग से किया जाता है, जिसमें सभी समाजों की सहभागिता देखने को मिलती है।

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