रायपुर तहसील में दस्तावेज जलाने का मामला ठंडे बस्ते में अतिरिक्त तहसीलदार और निजी कर्मचारियों पर मेहरबान प्रशासन
रायपुर। राजधानी के तहसील कार्यालय में बिना अनुमति महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को आग के हवाले करने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। चोरी छिपे दर्जनों फाइलें जलाने की इस गंभीर घटना को एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन जिम्मेदार अतिरिक्त तहसीलदार प्रकाश सोनी के खिलाफ अब तक न तो कोई जांच बैठाई गई है और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई हुई है। प्रशासन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में तहसील कार्यालय परिसर में करीब साठ बंडल सरकारी दस्तावेज जला दिए गए थे। इन दस्तावेजों में आम जनता के आवेदन शपथ पत्र घोषणा पत्र रजिस्ट्री पेपर और कई महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र शामिल थे। सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि इन सरकारी फाइलों को नष्ट करने का काम बाहरी और निजी कर्मचारियों के हाथों करवाया गया। नियमानुसार किसी भी सरकारी कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों द्वारा दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रावधान है। इसके बावजूद तहसील कार्यालय के आला अधिकारियों ने अब तक पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
तहसील कार्यालय में निजी कर्मचारियों के हस्तक्षेप का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इनका दबदबा और विवाद सामने आ चुका है। हाल ही में आदेश पारित कराने के एवज में रुपयों की मांग को लेकर इन निजी कर्मचारियों और वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। इस विवाद का वीडियो भी सामने आया था जिसके बाद दर्जन भर से अधिक वकीलों ने तहसील परिसर में जमकर हंगामा किया था। इतनी बड़ी घटना और लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद इन बाहरी तत्वों को कार्यालय से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया है।
तेईस फरवरी को इस मामले के खुलासे के बाद उम्मीद थी कि जिला प्रशासन सख्त कदम उठाएगा और बिना कलेक्टर की अनुमति के फाइलें जलाने वालों पर गाज गिरेगी। लेकिन विभाग की मौजूदा कार्यप्रणाली देखकर लगता है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इस तरह की लापरवाही और निजी कर्मचारियों का बढ़ता दखल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
