अधिवक्ता पर नाराज हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश,

अधिवक्ता पर नाराज हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश,नई दिल्ली : कही ये बात कहा कि क्या यह मौत की सजा का मामला है या फिर प्रेग्नेंसी के टर्मिनेशन का? कृपया रिजनेबल रहें। नई दिल्ली: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ विभिन्न अहम मामलों में सुनाए गए अपने फैसलों के लिए […]

अधिवक्ता पर नाराज हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश,
नई दिल्ली : कही ये बात कहा कि क्या यह मौत की सजा का मामला है या फिर प्रेग्नेंसी के टर्मिनेशन का? कृपया रिजनेबल रहें। नई दिल्ली: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ विभिन्न अहम मामलों में सुनाए गए अपने फैसलों के लिए जाने जाते हैं। सीजेआई अनुशासन को भी काफी पसंद करते हैं और जब कोई उसे तोड़ता है तो खासा नाराज भी हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की कई सुनवाइयों के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ के गुस्से में आते हुए भी लोगों ने देखा है। यहां तक कि वे कुछ गलत होने पर वकीलों को भी फटकार लगाने से नहीं चूकते। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई होनी थी, जिसमें सीजेआई काफी नाराज हो गए। उन्होंने देर रात 10 बजे भेजे गए एक ईमेल पर सवाल उठा दिया।
अदालती सुनवाइयों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, पिछले दिनों एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया कि रात दस बजे मामले को लिस्ट किए जाने के लिए ईमेल भेजा था। इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने जवाब दिया कि कम से कम सीजेआई को मेल देखने की अनुमति दें। इसके बाद उन्होंने नाराज होते हुए कहा कि क्या यह मौत की सजा का मामला है या फिर प्रेग्नेंसी के टर्मिनेशन का? कृपया रिजनेबल रहें। इस पर वकील ने जवाब दिया कि नहीं, जिस पर सीजेआई ने कहा फिर? रात दस बजे ईमेल भेजना कहां तक जायज है?
बता दें कि इसी तरह पिछले दिनों जब सांसदों और विधायकों को डिजिटली मॉनिटर करने की मांग वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई तो भी सीजेआई ने नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यह क्या याचिका है, हम डिजिटली कैसे निगरानी कर सकते हैं। प्राइवेसी नाम की भी कोई चीज होती है। यह जनता का वक्त है, नाकि हमारा ईगो। अगर याचिका को हम खारिज करते हैं तो आपको पांच लाख रुपये जुर्माना भरना होगा। हालांकि, बाद में बिना जुर्माना लगाए सीजेआई चंद्रचूड़ ने याचिका को खारिज कर दिया था। Also Read – ऊना में 16 एमएम बारिश, गेहूं की फसल को मिली संजीवनी इसी तरह जनवरी के आखिरी में भी एक वकील की सीजेआई ने क्लास लगा दी थी। उन्होंने कहा था कि कोई प्लेटफॉर्म नहीं है कि बस जो ट्रेन आ गई, उस पर चढ़ गए। वकील ने ज्यूडिशियरी में रिफॉर्म से संबंधित याचिका को मेंशन करने की कोशिश की थी। इसी दौरान सीजेआई ने पूछ लिया कि कैसे आप इसे दोपहर 12 बजे मेंशन कर सकते हैं। क्या आप सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं? आप बस खड़े हुए और मेंशन कर दी।

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मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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