दुर्ग के स्वामी आत्मानंद स्कूल में रहस्यमयी घटनाओं से हड़कंप! 3 दिन में 11 छात्राएं बेहोश, डॉक्टर भी नहीं लगा पा रहे कारण का पता
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के खम्हरिया स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही एक रहस्यमयी घटना ने छात्रों, अभिभावकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। स्कूल में अलग-अलग कक्षाओं की छात्राएं अचानक घबराकर बेहोश हो रही हैं। कई छात्राओं के व्यवहार में भी अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक कुल 11 छात्राएं प्रभावित हो चुकी हैं। सभी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन प्राथमिक जांच में कोई गंभीर शारीरिक बीमारी सामने नहीं आई। डॉक्टरों और शिक्षा विभाग की टीम मामले की वजह जानने में जुटी है।
स्कूल की प्राचार्य सुनीता दीवान के अनुसार, घटनाओं की शुरुआत 9 जुलाई को हुई। सबसे पहले कक्षा पांच की एक छात्रा खेल अवधि के दौरान अचानक पसीने से तर हो गई, उसे सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद वह बेहोश होकर गिर पड़ी। यह घटना देखकर आसपास मौजूद चार अन्य छात्राएं भी घबराहट और असामान्य व्यवहार के बाद बेहोश हो गईं। सभी छात्राओं को तत्काल प्राथमिक उपचार दिलाया गया और परिजनों को सूचना देकर घर भेजा गया।
लगातार तीन दिनों तक सामने आए ऐसे ही मामले
इसके बाद 11 जुलाई को कक्षा 9वीं और 10वीं की तीन छात्राएं अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगीं और कुछ ही देर में अर्ध-बेहोशी की अवस्था में गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जुनवानी ले जाया गया, जहां करीब तीन घंटे उपचार और निगरानी के बाद डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ बताते हुए छुट्टी दे दी। सोमवार, 13 जुलाई को फिर तीन छात्राओं के साथ इसी तरह की घटना हुई। छात्राएं अचानक घबराईं, चिल्लाईं और बेहोश होकर गिर गईं। यह देखकर स्कूल में मौजूद अन्य बच्चे भी डर गए और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां कुछ देर निगरानी के बाद उन्हें भी घर भेज दिया गया।
जांच के लिए पहुंची टीम, अंधविश्वास से बचने की अपील
घटना की जानकारी मिलने पर शिक्षा विभाग के अधिकारी अमित घोष अपनी आठ सदस्यीय टीम के साथ स्कूल पहुंचे। उन्होंने प्राचार्य, शिक्षकों और छात्राओं से चर्चा कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली तथा बच्चों और अभिभावकों को अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी। ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह के अंधविश्वास पर विश्वास न किया जाए। प्रारंभिक स्तर पर इसे मनोवैज्ञानिक कारणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
डॉक्टर और शिक्षा विभाग भी तलाश रहे वजह
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अस्पताल पहुंचकर छात्राओं से बातचीत की, लेकिन वे स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं बता सकीं। अस्पताल पहुंचने तक अधिकांश छात्राओं की स्थिति सामान्य हो जाती है और डॉक्टर भी प्राथमिक जांच में उन्हें स्वस्थ पाते हुए कुछ समय बाद डिस्चार्ज कर देते हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्राओं के साथ बार-बार ऐसा क्यों हो रहा है। शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं, ताकि वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।
