आधी रात तक सीएम हाउस में चली बैठक, फेरबदल की चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल
रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार रात अचानक बुलाई गई बैठक ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए है। देर शाम मंत्रियों को बैठक की सूचना मिलने के बाद एक-एक कर सभी मंत्री सीएम हाउस पहुंचने लगे और बैठक आधी रात तक चली। बैठक में भाजपा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल फेरबदल, प्रदर्शन समीक्षा और सत्ता-संगठन के रिश्तों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
हालांकि बैठक खत्म होने के बाद सरकार की ओर से फेरबदल की अटकलों को खारिज कर दिया गया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि बैठक केवल संगठनात्मक समन्वय और आगामी कार्यक्रमों की रणनीति को लेकर थी, तो इसके लिए इतनी गोपनीयता और देर रात तक चली लंबी चर्चा की आवश्यकता क्यों पड़ी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अचानक बुलाई गई बैठकों से स्वाभाविक रूप से सत्ता के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर कयास लगने लगते हैं।
बैठक के बाद मंत्रियों ने दावा किया कि केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा पर चर्चा हुई। लेकिन विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक यह सवाल उठा सकते हैं कि जनता से जुड़े मुद्दों, विकास कार्यों और प्रशासनिक चुनौतियों पर सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और क्या सत्ता-संगठन के समीकरणों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल, मंत्रिमंडल फेरबदल की खबरों को सरकार ने निराधार बताया है, लेकिन देर रात तक चली इस बैठक ने यह जरूर संकेत दिया है कि सत्ता और संगठन के भीतर कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन जारी है। बैठक का वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में संगठनात्मक फैसलों, राजनीतिक नियुक्तियों या सरकार की रणनीतियों में दिखाई देता है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।
