बिलासपुर हाईकोर्ट के न्याय के मंदिर में सीनियर का रुतबा; 11 दिग्गजों को मिला सीनियर एडवोकेट का प्रतिष्ठित गाउन, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

बिलासपुर हाईकोर्ट के न्याय के मंदिर में सीनियर का रुतबा; 11 दिग्गजों को मिला सीनियर एडवोकेट का प्रतिष्ठित गाउन, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के लीगल कॉरिडोर (न्यायिक गलियारों) में इन दिनों जश्न और गौरव का माहौल है। वकालत के पेशे में हर काले कोट पहनने वाले का एक ही अल्टीमेट सपना होता है— 'सीनियर एडवोकेट' का वो प्रतिष्ठित गाउन पहनना। बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रदेश के कानूनी इतिहास में एक अहम अध्याय जोड़ते हुए 11 दिग्गज वकीलों को इसी सीनियर एडवोकेट के दर्जे से नवाजा है।

यह सिर्फ एक पदनाम नहीं है, बल्कि यह मुहर है उन बरसों की तपस्या, कानूनी पेचीदगियों की समझ और कोर्टरूम में की गई उन शानदार जिरह की, जिसने न्याय के मंदिर में इन वकीलों का लोहा मनवाया है।

चीफ जस्टिस की फुल बेंच ने दी हरी झंडी

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इस बड़े फैसले के पीछे एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कुशल नेतृत्व में हाईकोर्ट की फुल बेंच ने जब इन नामों के प्रस्ताव पर मुहर लगाई, तो मानो प्रदेश के लीगल सर्किट को एक बड़ी सौगात मिल गई। 28 अप्रैल 2026 को रजिस्ट्रार जनरल की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। यह पूरी नियुक्ति प्रक्रिया एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 16 और हाईकोर्ट नियम 2025 के कड़े मापदंडों की कसौटी पर कसने के बाद पूरी की गई है।

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कौन हैं वो चेहरे, जो बने इस 'इलीट क्लब' का हिस्सा?

हाईकोर्ट से जारी हुई इस प्रतिष्ठित सूची में जिन दिग्गजों का नाम शामिल है, उनमें शैलेन्द्र दुबे, रणवीर सिंह मरहास, यशवंत ठाकुर, अनूप मजूमदार, नीलाभ दुबे, अमृतो दास, आतीं सिद्दीकी, नौशिना आफरीन अली, अरविन्द श्रीवास्तव और तारेंद्र कुमार झा सहित कुल 11 वकीलों को यह तमगा मिला है। इन सभी के पास कानून की बारीकियों को सुलझाने का दशकों पुराना तजुर्बा है।

क्यों अहम है यह 'सिल्क गाउन' और क्या बदलेगा?

नजरिया बदल कर देखें, तो सीनियर एडवोकेट बनना महज़ एक प्रमोशन नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। अब जब ये 11 चेहरे कोर्ट रूम में हाई-प्रोफाइल या जटिल मामलों में जिरह के लिए उतरेंगे, तो उनका पहनावा (सिल्क गाउन) और उनका रसूख अदालत में अलग ही नजर आएगा। न्यायपालिका भी इन सीनियर्स के कानूनी तजुर्बे को एक 'विशेषज्ञ' की तरह तरजीह देगी।

हाईकोर्ट का यह कदम सिर्फ अनुभव को सलाम करना नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों युवा वकीलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अगर आपकी दलीलों में दम है और कानून की किताबों पर आपकी पकड़ मजबूत है, तो आपकी प्रतिभा को एक दिन यह मुकाम जरूर मिलेगा। निश्चित तौर पर अब राज्य के बड़े मामलों में इन सीनियर्स की भूमिका एक 'गेम-चेंजर' साबित होगी।

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