हादसा या हत्या? गौरांग बोबड़े केस में पुलिस की जांच पर उठे सवाल, आरोपी बाइज्जत रिहा

बिलासपुर। बहुचर्चित गौरांग बोबड़े मौत मामले में लगभग 9 वर्ष बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। पुलिस द्वारा आरोपों को सिद्ध करने के लिए ठोस सबूत पेश नहीं किए जाने के कारण न्यायालय ने मामले में नामजद चारों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। इसके साथ ही वर्ष 2016 से चला आ रहा यह चर्चित मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया।

क्या था पूरा मामला
घटना 21 जनवरी 2016 की है। पुराना बस स्टैंड क्षेत्र निवासी बिल्डर श्रीरंग बोबड़े का बेटा गौरांग बोबड़े अपने दोस्तों के साथ मैग्नेटो मॉल स्थित टीडीएस बार में पार्टी कर रहा था। देर रात करीब पौने तीन बजे, सभी युवक नीचे जाने के लिए सर्विस लिफ्ट की ओर बढ़े। लिफ्टमैन द्वारा लिफ्ट से जाने की सलाह देने के बावजूद वे सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे। इसी दौरान गौरांग का पैर फिसल गया और वह करीब 30 फीट की ऊंचाई से बेसमेंट में गिर गया। उसके दोस्त तुरंत उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच और आरोपों में बदलाव
घटना के अगले दिन सिविल लाइन पुलिस ने मॉल पहुंचकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने मामले में धारा 304 (भाग-2) के तहत अपराध दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और चालान कोर्ट में पेश किया। बाद में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले में हत्या की धारा 302 जोड़ दी गई और सुनवाई शुरू हुई।

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9 साल चली सुनवाई, सबूतों में नाकामी
करीब 9 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद 15 जनवरी को नवम अपर सत्र न्यायाधीश अगम कुमार कश्यप ने दोनों पक्षों की गवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस हत्या के कारणों और आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रही, न ही कोई ऐसा ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सका जिससे आरोप सिद्ध हो सकें।

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चारों आरोपी बाइज्जत बरी
सबूतों के अभाव में कोर्ट ने मामले में आरोपी किंशुक अग्रवाल, अंकित मल्होत्रा, करण जायसवाल और करण खुशलानी को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।

मामले का पटाक्षेप
करीब एक दशक तक चले इस हाई-प्रोफाइल केस के फैसले के साथ ही गौरांग बोबड़े मौत मामले का कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है। फैसले के बाद शहर में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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