NHM भर्ती घोटाला: इस्तीफे के 1 साल बाद उसी पद पर गुपचुप' नियुक्ति; न विज्ञापन निकला, न इंटरव्यू
स्वास्थ्य विभाग में बैकडोर एंट्री का भंडाफोड़, लाखों बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की अनदेखी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में बिना विज्ञापन और पारदर्शी प्रक्रिया के 'बैकडोर एंट्री' का चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि जिस व्यक्ति ने करीब एक साल पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, उसे बिना किसी नई चयन प्रक्रिया के उसी कुर्सी पर दोबारा बैठा दिया गया है। इस पूरी गुपचुप नियुक्ति में न तो कोई रोजगार विज्ञापन जारी हुआ और न ही प्रदेश के लाखों पात्र युवाओं को आवेदन करने का अवसर दिया गया।
इस्तीफा मंजूर हुआ, अनुभव प्रमाण पत्र भी दे दिया ...
विभागीय सूत्रों और दस्तावेजों के मुताबिक, उक्त व्यक्ति ने पिछले साल स्वेच्छा से अपने पद से इस्तीफा दिया था। उस वक्त एनएचएम प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए त्यागपत्र मंजूर कर लिया था। इसके बाद बकायदा संबंधित व्यक्ति को विभाग की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) भी जारी कर दिया गया। विभागीय नियमों के अनुसार, एक बार इस्तीफा मंजूर होने और पद रिक्त घोषित होने के बाद उस पर नई भर्ती एक खुली और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए। लेकिन, करीब एक साल बाद विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने सारे नियमों को ताक पर रखकर उसी व्यक्ति को सीधे नियुक्ति पत्र थमा दिया।
क्या पूरे प्रदेश में कोई और योग्य उम्मीदवार नहीं मिला?
इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और समान अवसर के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में इस समय लाखों शिक्षित युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और सरकारी भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पूरे प्रदेश में उस पद के लिए संबंधित श्रेणी में कोई अन्य पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं था? यदि विभाग को उस पद पर दोबारा नियुक्ति की आवश्यकता थी, तो खुली भर्ती निकालकर सभी पात्र युवाओं को मौका क्यों नहीं दिया गया? यह सीधे तौर पर प्रदेश के बेरोजगारों के अधिकारों पर डाका है।
मंत्री और मिशन डायरेक्टर की भूमिका सवाल के घेरे में...
इस बिना विज्ञापन वाली नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और एनएचएम के मिशन डायरेक्टर की भूमिका को लेकर खड़ा हो गया है। क्या इस नियुक्ति प्रक्रिया से पहले फाइलों की उचित समीक्षा की गई थी? विभाग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि यह सीधी नियुक्ति किस विशेष नियम या विशेषाधिकार के तहत की गई है। इस तरह के मामलों से बेरोजगार युवाओं के बीच व्यवस्था को लेकर असंतोष और गहरा हो गया है।
1. शिक्षकों की भर्ती में भी चल रही है भारी लेटलतीफी
प्रदेश में सरकारी नौकरियों को लेकर पहले ही भारी असंतोष है। स्कूल शिक्षा विभाग में भी शिक्षकों की नियुक्ति और मनचाही पदस्थापना जैसे मामलों में अभ्यर्थी लंबे समय से भटक रहे हैं। एक तरफ जहां योग्य युवा एक-एक पद के लिए कलेक्ट्रेट और मंत्रालयों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बंद कमरों में बिना इंटरव्यू के चहेतों को नौकरी बांटी जा रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमों की उड़ी धज्जियां
जीएडी के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी रिक्त पद (संविदा या नियमित) को भरने से पहले रोजगार नियोजन कार्यालय में सूचना और समाचार पत्रों में विज्ञापन देना अनिवार्य है। इसमें आरक्षण और रोस्टर प्रणाली का भी सख्ती से पालन होना चाहिए। लेकिन इस ताजा मामले में न तो विज्ञापन निकला और न ही किसी आरक्षण रोस्टर का पालन हुआ।
