पीड़िता के चरित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी पड़ी भाजपा नेता को भारी, एफआईआर दर्ज, आदिवासी समाज को लेकर बयान से मचा बवाल
सरगुजा : सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर हो रही व्यक्तिगत टीका-टिप्पणियों के बीच एक बयान ने ऐसा तूल पकड़ा कि मामला सीधे थाने पहुंच गया। आदिवासी महिला से जुड़े यौन दुर्व्यवहार के मामले में पीड़िता के चरित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी करने और आदिवासी समाज को लेकर कथित रूप से अपमानजनक बयान देने के आरोप में भाजपा नेता एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र तिवारी के खिलाफ अजाक थाने में अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1), 353(2) तथा एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई हैं।
एक बयान से बढ़ गया विवाद
मामला 11 अगस्त को शहर की एक दुकान में आदिवासी महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना से जुड़ा है। इस मामले में सिटी कोतवाली में अपराध दर्ज होने के बाद कैट सरगुजा के पदाधिकारियों ने एसएसपी को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण समाप्त करने की मांग की थी। शिकायतकर्ता सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीहा सोनहा का आरोप है कि ज्ञापन के बाद रविंद्र तिवारी ने सार्वजनिक रूप से पीड़िता को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसमें उसके चरित्र पर सवाल उठाया गया। आरोप है कि उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता शंकरगढ़ थाने में पहले भी इसी तरह का कृत्य कर चुकी है।
आदिवासी समाज का हुआ अपमान
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रविंद्र तिवारी ने आदिवासी समाज के लोगों पर शासन से मिलने वाली राशि के लालच में एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामले दर्ज कराने जैसी टिप्पणी की। इस कथित बयान को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी से न केवल यौन दुर्व्यवहार की शिकायत करने वाली महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा और गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का भी अपमान हुआ है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी से मूल प्रकरण की निष्पक्ष जांच प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
पुलिस खंगालेगी शंकरगढ़ थाने का रिकॉर्ड
मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से मांग की है कि शंकरगढ़ थाने के अभिलेखों की जांच कर यह सत्यापित किया जाए कि संबंधित महिला के खिलाफ पहले कभी इस तरह की कोई शिकायत दर्ज हुई थी या नहीं। इसके अलावा रविंद्र तिवारी के कथित बयान से जुड़े वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड जब्त करने, महिला का पूरक बयान दर्ज करने तथा सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सार्वजनिक रूप से दिए गए कथित बयान की वास्तविकता क्या है और शंकरगढ़ थाने से जुड़े पुराने मामले को लेकर किया गया दावा रिकॉर्ड से कितना मेल खाता है। मामले की जांच के साथ ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस एफआईआर को लेकर हलचल तेज हो गई है।
