मेकाहारा खुद हुआ 'बीमार': रोज आ रहे 3000 मरीज, लेकिन 1204 में से 629 पद खाली, 4 महीने से मंत्रालय में अटकी भर्ती की फाइल
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बेड बढ़कर 1355 हुए, लेकिन 620 तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की अनुमति अब भी फाइलों में कैद है।
रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) की व्यवस्थाएं खुद 'वेंटिलेटर' पर हैं। अस्पताल में रोजाना 2000 से 3000 मरीज ओपीडी और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नदारद है। सिस्टम की सुस्ती का सबसे ठोस उदाहरण यह है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के खाली पड़े 620 पदों को भरने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने पूरे चार माह पहले भर्ती की अनुमति का प्रस्ताव शासन को भेजा था। यह फाइल आज तक मंत्रालय के गलियारों में चक्कर काट रही है। नतीजा यह है कि मरीजों का भारी बोझ महज 575 कर्मचारियों के कंधों पर आ गया है, जिससे अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
राजधानी रायपुर स्थित यह अस्पताल पूरे प्रदेश के मरीजों की आखिरी उम्मीद होता है। दूर-दराज के जिलों से गंभीर मरीज यहां रेफर किए जाते हैं। मरीजों के इसी दबाव को देखते हुए जून 2026 तक अस्पताल में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 1355 कर दी गई। लेकिन विडंबना देखिए कि अस्पताल की क्षमता तो बढ़ाई गई, मगर कर्मचारियों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।
वर्तमान में अस्पताल में कुल 1204 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 629 पद पूरी तरह से खाली हैं। यानी आधे से ज्यादा पदों पर काम करने वाला ही कोई नहीं है। तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी (वॉर्ड बॉय, सफाईकर्मी, क्लर्क आदि) की भारी कमी का सीधा असर मरीजों की तत्काल देखभाल और अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है। मौजूदा स्टाफ पर काम का इतना भारी दबाव है कि हर मरीज को सही समय पर अटेंड करना लगभग असंभव हो गया है।
आंकड़ों में समझिए मेकाहारा का बदहाल सिस्टम:
कुल स्वीकृत पद: 1204
कार्यरत कर्मचारी: 575
कुल खाली पद: 629
*तृतीय श्रेणी: 811 पद स्वीकृत, 365 कार्यरत, 446 खाली।
* चतुर्थ श्रेणी: 374 पद स्वीकृत, 200 कार्यरत, 174 खाली।
* द्वितीय श्रेणी: 19 स्वीकृत, 10 कार्यरत, 9 रिक्त।
सबसे बड़ा सवाल: बेड बढ़े, लेकिन स्टाफ क्यों नहीं?
सिस्टम की नाकामी का यह सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में बेड की संख्या तो बढ़ा दी, लेकिन यह नहीं सोचा कि उन अतिरिक्त बेड्स पर भर्ती मरीजों का इलाज कौन करेगा। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद, चार महीने से भर्ती प्रक्रिया का एक कदम भी आगे न बढ़ना सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि बिना स्टाफ के 1355 बेड का अस्पताल सुचारू रूप से कैसे संचालित होगा?
कार्डियक संस्थान का भी बुरा हाल: आधे से ज्यादा पद रिक्त
मेकाहारा से जुड़े कार्डियक (हृदय रोग) संस्थान में भी स्टाफ का भारी टोटा है। यहां गंभीर हृदय रोगियों के लिए 31 बेड की व्यवस्था है और इसके लिए 53 पद स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ 21 पद ही भरे गए हैं, जबकि 32 पद खाली पड़े हैं। कार्डियक जैसे क्रिटिकल केयर वाले संस्थान में इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली होना, आपात स्थिति में मरीजों की जान पर भारी पड़ सकता ह
अधिकारी का जवाब: शासन को भेजा जा चुका है प्रस्ताव
मेकाहारा में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और स्टाफ की आवश्यकता को लेकर भर्ती का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। फिलहाल हम उपलब्ध स्टाफ के साथ ही मरीजों को बेहतर व्यवस्था और इलाज देने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, मेकाहारा, रायपुर
