औद्योगिक हादसे ने उजाड़ा परिवार: 9 माह की मासूम के बाद पिता और युवक की भी मौत, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

औद्योगिक हादसे ने उजाड़ा परिवार: 9 माह की मासूम के बाद पिता और युवक की भी मौत, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

रायगढ़। खरसिया क्षेत्र में 5 फरवरी को हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक घटना में पहले 9 माह की मासूम बच्ची भूमि खड़िया की इलाज के दौरान मौत हुई थी, अब उसके पिता शिव खड़िया और 19 वर्षीय इंदीवर ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। लगातार तीन मौतों ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।

घायलों का इलाज रायपुर के एक निजी बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में चल रहा था। चिकित्सकों के अनुसार मृतक 70 से 90 प्रतिशत तक झुलस चुके थे और उनकी हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई थी। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पहले मासूम की मौत, फिर पिता की सांसें थमना, इस हादसे ने एक ही परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। इंदीवर की मौत ने दर्द को और बढ़ा दिया। क्षेत्र में इस घटना को लेकर गम के साथ-साथ आक्रोश भी देखा जा रहा है।

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कई घायल अब भी जिंदगी की जंग में
हादसे में झुलसे अन्य लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और हालत गंभीर बताई जा रही है।

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  • साहेब लाल खड़िया (45) – 80–90% तक झुलसे
  • उदाशिनी खड़िया (25) – 30–40% तक झुलसी
  • कौशल (25) – 70–80% तक झुलसे
  • प्रिया (32) – 70–80% तक झुलसी

चिकित्सकों की टीम लगातार उपचार में जुटी है, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

FIR दर्ज, दबाव के आरोप
घटना को लेकर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। वहीं पीड़ित परिवारों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से एफआईआर वापस लेने और बयान बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

पीड़ितों की प्रमुख मांगें
परिजनों और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • मृतकों के आश्रितों को तत्काल उचित मुआवजा और सरकारी सहायता
  • सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च प्लांट प्रबंधन से वसूल किया जाए
  • कथित दबाव की न्यायिक या स्वतंत्र जांच
  • जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन पर सख्त आपराधिक कार्रवाई
  • पीड़ित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

इस दर्दनाक हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

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