पहली बारिश में ही रेलवे ओवरब्रिज की खुली पोल: बरगा में सड़क धंसी, आलीवारा में दरारें; निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
राजनांदगांव। जिले में रेल फाटकों पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से बनाए गए बरगा और आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश के बाद विवादों में आ गए हैं। शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद दोनों पुलों की एप्रोच रोड और सड़क पर कई जगह दरारें दिखाई दीं, जबकि बरगा ओवरब्रिज के पास सड़क का एक हिस्सा काफी नीचे बैठ गया। नई बनी सड़क की इस हालत को देखकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच की मांग की है।
दो महीने पहले शुरू हुआ पुल, अब सड़क बैठने लगी
ग्रामीणों का कहना है कि बरगा रेलवे ओवरब्रिज पर यातायात शुरू हुए अभी करीब दो महीने ही हुए हैं। इतने कम समय में सड़क का लगभग 100 मीटर हिस्सा प्रभावित हो गया है। कई जगह लंबी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि एक हिस्से में सड़क करीब सात फीट तक धंस गई है। वहीं कुछ स्थानों पर डामर भी उखड़ चुका है, जिससे बड़े वाहनों के साथ-साथ दोपहिया चालकों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क से वर्षों तक सुरक्षित आवागमन की उम्मीद थी, वह पहली ही बारिश की परीक्षा में असफल साबित होती दिख रही है।
आलीवारा ओवरब्रिज भी नहीं बचा
सिर्फ बरगा ही नहीं, बल्कि हाल ही में चालू किए गए आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पर भी बारिश का असर साफ दिखाई दिया। एप्रोच रोड के कई हिस्सों में चौड़ी दरारें उभर आईं और सड़क की सतह बैठने लगी। स्थिति को देखते हुए रेलवे ने क्षतिग्रस्त हिस्सों पर मरम्मत कार्य शुरू कराया, लेकिन ग्रामीणों ने इसे स्थायी समाधान मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यदि निर्माण में तकनीकी खामी रही है तो केवल गड्ढे भर देने या पैचवर्क करने से समस्या खत्म नहीं होगी। दोषपूर्ण हिस्सों का दोबारा निर्माण कराया जाना चाहिए।
करोड़ों खर्च, फिर भी पहली बारिश नहीं झेल पाया निर्माण
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो इतनी नई सड़क पहली ही बारिश में इस तरह क्षतिग्रस्त नहीं होती। लोगों का यह भी कहना है कि निर्माण एजेंसी के साथ-साथ कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। आखिर गुणवत्ता परीक्षण के बावजूद ऐसी खामियां कैसे रह गईं, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पुरानी घटना से भी नहीं लिया गया सबक
जिले में रेलवे ओवरब्रिज की गुणवत्ता को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले मनगटा-मुढ़ीपार रेलवे ओवरब्रिज में भी निर्माण के कुछ समय बाद सड़क में दरारें आने की शिकायत सामने आई थी। उस मामले में भी मरम्मत कराई गई थी और गुणवत्ता का मुद्दा विधानसभा तक पहुंचा था। अब बरगा और आलीवारा की स्थिति सामने आने के बाद लोगों का कहना है कि पहले के अनुभवों से भी कोई सबक नहीं लिया गया।
ग्रामीणों की मांग- स्वतंत्र जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
ग्रामीणों ने मांग की है कि दोनों ओवरब्रिजों की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण सामग्री, डिजाइन या कार्यप्रणाली में कोई कमी सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यह केवल सड़क खराब होने का मामला नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
रेलवे ने शुरू कराया निरीक्षण
घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त हिस्सों का निरीक्षण किया। सीनियर सेक्शन इंजीनियर ए.के. मौर्य ने बताया कि प्रभावित स्थानों पर सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि स्थानीय लोग केवल मरम्मत के बजाय पूरी गुणवत्ता जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से बने ऐसे निर्माण कार्यों की जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो।
