तीन मौतों के बाद बेकाबू हुई भीड़! डायल-112 टीम को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, वर्दी तक फाड़ी
सूरजपुर: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में सड़क हादसे में तीन युवकों की मौत के बाद हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची डायल-112 टीम पर हमला कर दिया। हादसे के बाद लोगों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि मदद के लिए पहुंचे आरक्षक और चालक को ही निशाना बना लिया गया। घटना ने एक बार फिर भीड़ के हिंसक होते रवैये और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
बताया जा रहा है कि दुर्घटना में तीन युवकों की मौत से गांव में भारी नाराजगी थी। इसी बीच जब डायल-112 की टीम घायलों और मृतकों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मौके पर पहुंची, तो कुछ लोगों ने उन पर देर से पहुंचने का आरोप लगाते हुए मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरक्षक की वर्दी तक फाड़ दी गई और चालक के साथ भी जमकर हाथापाई की गई। दोनों को बाद में स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि सड़क हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के बजाय राहत और बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को निशाना बनाना कितना उचित है। ऐसे घटनाक्रम आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मचारियों के मनोबल पर भी असर डाल सकते हैं।
ग्रामीणों की ओर से हादसे को लेकर कुछ आरोप लगाए गए हैं, वहीं पुलिस ने उन दावों को गलत बताया है। अधिकारियों का कहना है कि डायल-112 टीम केवल सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची थी और पहले भी घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर चुकी थी। फिलहाल, पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हादसे के बाद उपजे गुस्से के नाम पर सरकारी कर्मचारियों पर हमला करना स्वीकार किया जा सकता है? यदि ऐसी घटनाओं पर सख्ती नहीं हुई तो भविष्य में आपातकालीन सेवाओं के लिए काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यप्रणाली दोनों प्रभावित हो सकती हैं। पुलिस ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
