छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति में हैवीवेट मंत्री का अड़ंगा करोड़ों की डील की आशंका

छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति में हैवीवेट मंत्री का अड़ंगा करोड़ों की डील की आशंका

रायपुर।छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में इन दिनों एक अजीब खेल चल रहा है। प्रदेश को अब तक अपना पूर्णकालिक डीजीपी नहीं मिल पाया है। सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट और यूपीएससी दोनों राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगा चुके हैं। जवाब देने की मियाद खत्म हो चुकी है। फिर भी मंत्रालय से फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। इसका कारण कोई कानूनी अड़चन नहीं है। बल्कि एक हैवीवेट भगवाधारी मंत्री का वीटो है। सत्ता के गलियारों में चर्चा बड़ी गर्म है। कहा जा रहा है कि पुलिस विभाग की इस सबसे बड़ी कुर्सी के लिए करोड़ों की डील हुई है। मामला इतना ज्यादा उलझ गया है कि सरकार को समझ ही नहीं आ रहा है। वह इस हैवीवेट मंत्री की जिद पूरी करे या फिर सीधे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का सामना करे।

यूपीएससी ने पिछले साल 13 मई 2025 को पैनल राज्य सरकार को भेज दिया था। इस पैनल में दो सीनियर आईपीएस अफसरों के नाम शामिल हैं। इनमें 1992 बैच के अरुण देव गौतम और 1994 बैच के हिमांशु गुप्ता का नाम है। आम तौर पर पैनल में तीन नाम होते हैं। लेकिन विकल्प कम होने से केवल दो ही नाम भेजे गए। पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद अरुण देव गौतम प्रभारी डीजीपी के तौर पर काम कर रहे हैं। नियम कहता है कि राज्य में प्रभारी डीजीपी नहीं होना चाहिए। इसी नियम के तहत अरुण देव गौतम का नाम पूर्णकालिक डीजीपी के लिए तय माना जा रहा था। पांच अप्रैल को रविवार की छुट्टी के दिन भी मंत्रालय में अधिकारी बैठे थे। एक बड़ा आदेश निकलने वाला था। लेकिन शाम होते होते चकरी ऐसी घूमी कि मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

 

Read More हादसा नहीं थी बुजुर्ग की मौत! जादू-टोने के शक में रची गई हत्या की साजिश, बोलेरो से कुचलकर वारदात को दुर्घटना का दिया रूप

सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ के एक बहुत ही कद्दावर मंत्री अरुण देव गौतम को इस पद पर नहीं देखना चाहते। वे हिमांशु गुप्ता को डीजीपी की कुर्सी पर बिठाना चाहते हैं। मंत्री जी की इस जिद के आगे पूरा सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा जोरों पर है कि पर्दे के पीछे करोड़ों का लंबा लेनदेन हो चुका है। शायद यही असल वजह है जिसके कारण अरुण देव गौतम का नाम फाइनल होते होते अचानक अटक गया। अब सिस्टम एक बड़े धर्मसंकट में फंसा है। एक तरफ वह अफसर है जिसने मैदान में नक्सलियों से सीधा लोहा लिया। दूसरी तरफ वह कद्दावर मंत्री हैं जिनकी नाराजगी सत्ता के लिए भारी पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ शायद देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा जहां यूपीएससी का पैनल आने के बाद भी सिर्फ एक मंत्री की जिद के कारण पुलिस मुखिया की नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

Read More डोंगरगढ़ में तड़के बड़ा सड़क हादसा: टक्कर के बाद कार में लगी भीषण आग, स्कूटी भी जली; वाहन मालिक की तलाश

इस पूरी देरी पर सुप्रीम कोर्ट का रुख बहुत ही सख्त है। साल 2006 का प्रकाश सिंह मामला राज्य डीजीपी नियुक्तियों के लिए सबसे बड़ा नियम है। कोर्ट का साफ आदेश है कि राज्य सरकारें यूपीएससी के भेजे गए वरिष्ठ अफसरों में से ही अपना डीजीपी चुनें। अभी हाल ही में 5 फरवरी 2026 को एक मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नियुक्ति में देरी हुई तो जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी। यूपीएससी ने भी राज्य के मुख्य सचिव को एक बहुत ही कड़ा पत्र लिखा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की दो हफ्ते की मियाद का जिक्र है। पर लगता है हमारी व्यवस्था को सर्वोच्च अदालत के आदेशों से ज्यादा फिक्र अपने राजनीतिक आकाओं को खुश रखने की है।

रेस में सबसे आगे चल रहे अरुण देव गौतम का करियर शानदार रहा है। कानपुर के रहने वाले अरुण देव जेएनयू से एमफिल करने के बाद 1992 में आईपीएस बने। वे छत्तीसगढ़ के कई चुनौती वाले जिलों के एसपी रहे हैं। साल 2009 में राजनांदगांव में बड़े नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां का एसपी बनाकर भेजा गया। इसके बाद 25 मई 2013 को झीरम घाटी का भीषण नक्सली कांड हुआ। तब भी संकट के समय सरकार ने अरुण देव गौतम को ही बस्तर का आईजी बना कर भेजा था। उन्होंने वहां हालात संभाले और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करवाए। उनका पलड़ा हर लिहाज से भारी है। फिर भी सिस्टम के तराजू में मंत्री जी का वजन एक अफसर के शौर्य से ज्यादा भारी साबित हो रहा है।

अब इस पूरे मामले पर सबकी निगाहें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री फिलहाल दो दिन के दिल्ली दौरे पर हैं। दिल्ली से उनके लौटने के बाद ही अब कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को बिना देरी किए फैसला लेना चाहिए। पैनल में सिर्फ दो ही नाम हैं। सरकार को जिस किसी को भी डीजीपी बनाना हो उसे तुरंत निर्णय लेकर फाइल पर मुहर लगा देनी चाहिए। इस तरह के लंबे अनिर्णय और सियासी सौदेबाजी से पुलिस फोर्स के जवानों के बीच बिल्कुल भी अच्छा संदेश नहीं जाता है।

Tags:

Latest News

छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में 5576 करोड़ का महाघोटाला, रात के अंधेरे में अपात्र ठेकेदारों को बांटे टेंडर छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में 5576 करोड़ का महाघोटाला, रात के अंधेरे में अपात्र ठेकेदारों को बांटे टेंडर
कोल घोटाले की काली कमाई पहुंची कवि कुमार विश्वास तक: रामनवमी पर कविता पढ़ने मिले 25 लाख, वाट्सएप चैट से खुला राज
निलंबित के आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, किस नियम से मिला कलेक्टर को अधिकार?
पीड़िता के चरित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी पड़ी भाजपा नेता को भारी, एफआईआर दर्ज, आदिवासी समाज को लेकर बयान से मचा बवाल
वर्दी में झाड़ू लगाती महिला आरक्षक का वीडियो वायरल… पुलिस लाइन में मचा हड़कंप, आरआई पर लगाए गंभीर आरोप
एयर गन से चली गोलियां… फिर वन विभाग ने बिछाया जाल, मृत पक्षियों के साथ दो शिकारी गिरफ्तार
Supreme Court: स्कूलों की मॉर्निंग असेंबली में रोज संविधान की प्रस्तावना पढ़ाने की PIL खारिज, SC ने कहा- कक्षा 6 से सिलेबस में शामिल
Saudi Husband Case: विदेश ले जाकर प्रताड़ित करने का आरोप, केरल की महिला की शिकायत पर पति और माता-पिता के खिलाफ केस
Drug Case: नशे की बड़ी खेप पर पुलिस का शिकंजा! 8-10 लाख की अफीम बरामद, सोनीपत के दो आरोपी गिरफ्तार
Bastar Nursing Protest: 2018 से लंबित ग्रेड-पे पर नर्सिंग स्टाफ का फूटा आक्रोश, डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में 3 दिन का विरोध
INDIA Bloc Protest: SIR विवाद पर दिल्ली में विपक्ष का प्रदर्शन तेज, 300 से ज्यादा सांसदों के मार्च पर पुलिस ने लगाया ब्रेक
NH-43 Accident: खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़ी बाइक, दो युवकों की मौत; तीसरा गंभीर रूप से घायल