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पत्नी को जिंदा जलाकर देखता रहा पति: हाईकोर्ट का सख्त फैसला- ‘मरते इंसान का बयान सबसे बड़ा सबूत’, उम्रकैद की सजा बरकरार
कबीरधाम: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पत्नी की निर्मम हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। पांडातराई क्षेत्र में वर्ष 2019 में हुए इस जघन्य अपराध में आरोपी ने चरित्र संदेह के चलते अपनी पत्नी पर केरोसीन डालकर आग लगा दी थी। गंभीर रूप से झुलसी महिला ने जान बचाने के लिए तालाब में छलांग लगाई, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि मरने से पहले दिया गया बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) न्यायिक प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साक्ष्य होता है। अदालत ने माना कि पीड़िता का बयान सुसंगत और भरोसेमंद था, जिसमें उसने सीधे अपने पति को जिम्मेदार बताया था। मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि घटना के समय पीड़िता मानसिक रूप से सक्षम थी और सच बोल रही थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी का व्यवहार अत्यंत अमानवीय था, क्योंकि उसने पत्नी को बचाने की कोई कोशिश नहीं की और घटना के दौरान तमाशबीन बना रहा। सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया। इस फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि ऐसे जघन्य अपराधों में कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
