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कानपुर का ‘जामताड़ा मॉडल’ बेनकाब: 100 कॉल रोज का टारगेट, 10 लाख की कमाई; गांव में चल रही थी साइबर ठगी की ‘ट्रेनिंग फैक्ट्री’
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने देशभर में सैकड़ों लोगों को ठगकर करोड़ों की अवैध कमाई की। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार तमिलनाडु में ठगी के तरीके सीखकर अपने गांव लौट आया और वहां ‘साइबर ठगी की पाठशाला’ शुरू कर दी। इस नेटवर्क में 15 से 55 वर्ष तक के करीब 100 लोग शामिल थे, जिन्हें रोजाना 100 लोगों को कॉल करने का टारगेट दिया जाता था।
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद संगठित थी। हर सदस्य को कॉलिंग स्क्रिप्ट दी जाती थी और सरकारी योजनाओं, पुलिस कार्रवाई या बैंकिंग प्रक्रियाओं का डर दिखाकर लोगों को जाल में फंसाया जाता था। पुलिस के अनुसार, रोजाना 8 से 10 लोग इनके झांसे में आ जाते थे, जिससे गिरोह की दैनिक कमाई करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी। पिछले चार वर्षों में इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा सहित कई राज्यों में 500 से अधिक लोगों को ठगा है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले मजदूरी के लिए तमिलनाडु गए थे, जहां उनकी मुलाकात साइबर ठगों से हुई। वहीं उन्होंने ठगी के नए तरीके सीखे और धीरे-धीरे इसमें माहिर हो गए। शुरुआत में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन एक बार शिकार फंसने के बाद उन्होंने इसे ही कमाई का जरिया बना लिया। गांव लौटने के बाद उन्होंने अन्य युवाओं को भी प्रशिक्षित कर इस नेटवर्क को बड़े स्तर पर फैलाया।
गांव में अलग-अलग जगहों—खेतों, पेड़ों के नीचे और ट्यूबवेल के पास बैठकर कॉलिंग की जाती थी, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। ठग खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से आधार कार्ड की जानकारी मांगते और फिर रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे। इसके अलावा अश्लील वीडियो देखने के नाम पर फर्जी पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर भी लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह इतना सक्रिय था कि झारखंड के कुख्यात जामताड़ा के ठगों को भी अपना शिकार बना चुका था। कई राज्यों के पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक के लोग शामिल हैं। अलग-अलग मामलों में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की ठगी की गई है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी की तलाश जारी है। साथ ही, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच की जा रही है, जिससे ठगी की कुल राशि और बढ़ने की संभावना है। इस कार्रवाई के बाद साइबर अपराध के खिलाफ सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
