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सरकारी दावों की हवा निकली: आधा सत्र बीता पर 72 हजार छात्राओं के पास अब भी साइकिल नहीं
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की सरस्वती साइकिल योजना इस साल सुस्त रफ्तार के कारण विवादों में घिर गई है। सत्र आधा बीत चुका है लेकिन प्रदेश की 72 हजार से ज्यादा जरूरतमंद छात्राओं को अब तक साइकिल नहीं मिल पाई है। 1 लाख 64 हजार छात्राओं को साइकिल देने का लक्ष्य रखा गया था पर सप्लाई करने वाली कंपनी ने अब तक सिर्फ 91,686 साइकिलें ही पहुंचाई हैं।
इस देरी के पीछे फंड की कमी और कंपनी द्वारा समय पर सप्लाई न दे पाना मुख्य वजह बताई जा रही है। हालत यह है कि अभी तक केवल 55 फीसदी छात्राओं को ही साइकिल मिली है। ग्रामीण इलाकों की छात्राएं हर दिन मीलों पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं जिससे उनकी पढ़ाई और हाजिरी दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।
रायपुर में भी वितरण की हालत खराब
राजधानी रायपुर के आंकड़े भी डराने वाले हैं। यहाँ 9 हजार 839 छात्राएं साइकिल के लिए चुनी गई थीं लेकिन अब तक 7 हजार 731 को ही इसका लाभ मिला है। बाकी छात्राएं हर दिन स्कूल में साइकिल आने का इंतजार कर रही हैं।
आंकड़ों की जुबानी: योजना का हाल
- कुल पात्र छात्राएं: 1,64,056
- अब तक मिली साइकिलें: 91,686
- इंतजार कर रही छात्राएं: 72,370
- रायपुर में वितरण: 7,731 (कुल 9,839 में से)
क्या कहते हैं जिम्मेदार
डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि सरस्वती साइकिल योजना का शुरुआती लक्ष्य 75 फीसदी तक पूरा हो चुका है। 100 फीसदी लक्ष्य पाने के लिए साइकिलों का ऑर्डर दिया जा चुका है और जल्द ही बाकी छात्राओं को भी वितरण कर दिया जाएगा।
पैदल जाने की मजबूरी और जेब पर बोझ
साइकिल न मिलने से सबसे ज्यादा परेशान वो छात्राएं हैं जो गांव से दूर स्कूल पढ़ने जाती हैं। अभिभावकों का कहना है कि पैदल चलने से लड़कियां थक जाती हैं और बस या ऑटो का किराया देना हर किसी के बस की बात नहीं है। अगर जल्द साइकिलें नहीं मिलीं तो कई लड़कियां स्कूल जाना छोड़ सकती हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
