शराब सिंडिकेट का 'खौफ': प्यादों पर कार्रवाई, लेकिन मास्टरमाइंड सब इंस्पेक्टरों को किसका संरक्षण? विभाग प्रमुख के हाथ क्यों कांप रहे?

शराब सिंडिकेट का 'खौफ': प्यादों पर कार्रवाई, लेकिन मास्टरमाइंड सब इंस्पेक्टरों को किसका संरक्षण? विभाग प्रमुख के हाथ क्यों कांप रहे?

 

  • राजनीतिक संरक्षण और सिंडिकेट के डर से असली दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने से कतरा रहा प्रशासन।

 

  •  कवर्धा में बैगा आदिवासियों से अवैध वसूली की शिकायत, विभाग की नीयत और कार्रवाई के तरीके पर उठे गंभीर सवाल।

कवर्धा में आबकारी के 'वसूलीबाज' एसआई: बैगा आदिवासियों पर ढा रहे जुल्म, 10-20 रुपए के लिए दे रहे जेल की धमकी

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 एसआई रायजादा और एसआई गीता पर फर्जी मुकदमे में फंसाकर अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप।

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 छत्तीसगढ़ में शराब सिंडिकेट के भ्रष्टाचार की जड़ें अब संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर चुकी हैं। बड़े शराब ठेकेदारों और माफियाओं को बचाने वाला आबकारी विभाग अब राज्य के सबसे गरीब और बेबस तबके को अपना शिकार बना रहा है।
कवर्धा जिले में तैनात आबकारी विभाग के दो सब इंस्पेक्टर, रायजादा और गीता, इन दिनों दहशत का दूसरा नाम बन गए हैं। ये दोनों अफसर अपनी वर्दी का रौब दिखाकर विशेष संरक्षित बैगा आदिवासियों को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकियां दे रहे हैं और खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं।

10 से 25 रुपए के लिए आदिवासियों से 'टेरर टैक्स'

एसआई रायजादा और एसआई गीता का काम करने का तरीका बेहद खौफनाक और अमानवीय है। ये दोनों अधिकारी सीधे तौर पर गरीब, सीधे-सादे और अनपढ़ बैगा ग्रामीणों को टारगेट करते हैं।
इन्हें अवैध शराब के झूठे मामलों में फंसाकर सीधे जेल भेजने का खौफ दिखाया जाता है। इस दहशत के एवज में हर ग्रामीण से 10 से 25 रुपए तक की नियमित अवैध वसूली की जा रही है। दैनिक मजदूरी करने वाले इन आदिवासियों के लिए यह छोटी सी रकम भी एक बड़े 'टेरर टैक्स' जैसी है।
रक्षकों को किसका संरक्षण? क्यों कांप रहे विभाग के हाथ?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्दी की आड़ में खुलेआम चल रही यह गुंडागर्दी किसके संरक्षण में हो रही है? जब ओवररेटिंग के मामले में दुर्ग, कांकेर और सरगुजा के तीन अन्य एसआई (अनिल गुप्ता, ओम प्रकाश, हरीश पटेल) सस्पेंड हो सकते हैं, तो रायजादा और गीता पर अब तक कोई गाज क्यों नहीं गिरी?
विभागीय चुप्पी इस बात का साफ इशारा कर रही है कि इन दागी इंस्पेक्टरों को सत्ता के किसी रसूखदार सफेदपोश का सीधा संरक्षण प्राप्त है। इसी राजनीतिक भय और सिंडिकेट के दबाव के कारण आबकारी विभाग के उच्चाधिकारी इन पर एफआईआर दर्ज करना तो दूर, इन्हें नोटिस तक जारी करने से कतरा रहे हैं।
परिषद ने सौंपी लिस्ट, फिर भी फाइलें ठंडे बस्ते में

इस खुली लूट और प्रताड़ना के खिलाफ छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने आबकारी आयुक्त पीएस एल्मा को लिखित शिकायत देकर इन दोनों एसआई की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।
अहम बात यह है कि शिकायत पत्र के साथ उन सभी प्रताड़ित बैगाओं की पूरी लिस्ट भी विभाग को सौंपी गई है, जिन्हें डरा-धमकाकर पैसे वसूले गए हैं। नाम, पते और सबूत सामने होने के बावजूद अब तक विभाग प्रमुख ने कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया है, जो प्रशासन की नीयत पर गहरे सवाल खड़े करता है।
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