खेत तैयार, खाद गायब! यूरिया-डीएपी के लिए भटक रहे किसान, सड़कों पर उतरा आक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल

खेत तैयार, खाद गायब! यूरिया-डीएपी के लिए भटक रहे किसान, सड़कों पर उतरा आक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल

खैरागढ़: खैरागढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद संकट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन यूरिया और डीएपी की कमी ने किसानों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। ग्राम पैलीमेटा में बड़ी संख्या में किसानों ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए है।

किसानों का आरोप है कि हर साल समय पर खाद उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। खेत तैयार हैं, मौसम अनुकूल है, लेकिन खाद की कमी के कारण किसान अपनी फसल को लेकर असमंजस में हैं।

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि खाद वितरण केंद्रों में लगातार स्टॉक की कमी बनी हुई है। कई किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक, बुवाई का समय निकलता जा रहा है और जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देने में व्यस्त हैं। समय पर खाद नहीं मिलने से खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

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खाद संकट को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच किसानों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त की जाती तो उन्हें सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती। प्रदर्शन में शामिल जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए खाद की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन के शुरुआती चरण में खाद की कमी लंबे समय में उत्पादन पर असर डाल सकती है। यदि बुवाई और शुरुआती पोषण चक्र प्रभावित होता है,तो इसका सीधा असर किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि किसान इस समस्या को केवल खाद की कमी नहीं, बल्कि अपनी आजीविका से जुड़ा संकट मान रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने साफ कहा कि यदि जल्द ही खाद की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। पैलीमेटा में फूटा यह आक्रोश सिर्फ एक गांव की नाराजगी नहीं, बल्कि उस बढ़ती बेचैनी का संकेत है जो खाद संकट के कारण पूरे कृषि क्षेत्र में महसूस की जा रही है।

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