Chhattisgarh Guest Teachers Protest: आधी रात एक्शन, धरना स्थल से हटाए गए अतिथि शिक्षक; टेंट जब्त, सुबह बसों में बैठाकर ले गई पुलिस
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पिछले 22 दिनों से आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों के धरने पर बुधवार देर रात पुलिस ने कार्रवाई की। हिंदी भवन के सामने चल रहे धरना स्थल से पुलिस ने टेंट हटाकर जब्त कर लिया। आज सुबह जब आंदोलनकारी दोबारा धरना देने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकते हुए करीब 50 अतिथि शिक्षकों को बसों में बैठाकर वहां से हटाया। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, जबकि बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
देर रात हटाया गया धरना स्थल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिन में प्रशासन ने अतिथि शिक्षकों को धरना समाप्त करने की चेतावनी दी थी। आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे, जिसके बाद देर रात पुलिस ने धरना स्थल पर पहुंचकर टेंट हटाने की कार्रवाई की। प्रशासन ने धरना स्थल से सामान भी जब्त कर लिया। आज सुबह आंदोलनकारी शिक्षक दोबारा प्रदर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया और कई शिक्षकों को पुलिस बसों में बैठाकर वहां से ले जाया गया।
शिक्षकों का दावा- आंदोलन खत्म नहीं हुआ
पुलिस कार्रवाई के बाद भी अतिथि शिक्षक संघ ने साफ किया कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि वे दोबारा शांतिपूर्ण ढंग से धरना देने का प्रयास करेंगे और जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार के साथ कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस सहमति नहीं बन पाई है।
शिक्षा मंत्री के निवास का भी किया था घेराव
इससे पहले आंदोलनकारी अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का लगभग 24 घंटे तक घेराव किया था। मंत्री से बातचीत कराने के आश्वासन के बाद शिक्षक वहां से लौटे और फिर हिंदी भवन के सामने धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत के बाद समाधान निकलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
किन मांगों को लेकर आंदोलन?
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि उनका आंदोलन संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और मानदेय बढ़ाने जैसी मांगों को लेकर जारी है। संगठन का दावा है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक भी शामिल हैं, लेकिन अब तक उनके भविष्य को लेकर स्थायी नीति नहीं बनाई गई है।
पुलिस और प्रशासन सतर्क
धरना स्थल पर पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे, वहीं आंदोलनकारी शिक्षक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। फिलहाल, सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है।
