छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत का सिलसिला जारी, 7 साल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने, केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ में हाथियों की मौत का सिलसिला जारी, 7 साल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने, केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के Surajpur जिले के Karanjwar में 15 साल के हाथी की संदिग्ध मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए Ministry of Environment, Forest and Climate Change ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।यह कार्रवाई वन्यजीव एक्टिविस्ट Ajay Dubey की शिकायत के बाद की गई है। मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन ने प्रमुख मुख्य वन संरक्षक को जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

करंट से मौत की आशंका, लेकिन कारण अब भी साफ नहीं
13 मार्च की सुबह गांव से करीब 200 मीटर दूर खेत में हाथी का शव मिला था। जांच में हाथी की सूंड पर काले निशान पाए गए हैं, जिससे करंट लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वन विभाग के अनुसार अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं और मौत के असली कारण का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही होगा।

7 साल में 63 हाथियों की मौत
आंकड़ों के अनुसार सरगुजा संभाग में पिछले 7 सालों में कुल 63 हाथियों की मौत हो चुकी है। इनमें से 40 हाथियों की मौत करंट लगने से हुई है, जो एक बड़ी चिंता का विषय है।

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करंट बना सबसे बड़ा खतरा
वन विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय कर जंगलों में बिजली लाइनों को सुरक्षित बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी योजना सामने नहीं आ सकी है। ग्रामीण इलाकों में अवैध बिजली तार और खेतों में लगाए गए करंट जाल हाथियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।

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पहले भी सामने आए ऐसे मामले
सूरजपुर में इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं-

  • 2024: धुरिया गांव के पास एक दंतैल हाथी को लाइव वायर बिछाकर मारा गया
  • 2022: दरहोरा गांव में मादा हाथी की करंट से मौत

इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष
लगातार बढ़ रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि मानव-हाथी संघर्ष और ज्यादा गहरा होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं।

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