दंतेवाड़ा लौह अयस्क घोटाला बिना पहाड़ खोदे कागजों पर उड़ गया 2.75 लाख टन लोहा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा. यहां एक कंपनी ने बिना पहाड़ खोदे और बिना ट्रक चलाए ही लाखों टन लौह अयस्क का खनन और परिवहन कर डाला. यह पूरा खेल सिर्फ कागजों पर हुआ है. रायपुर की आरती स्पंज कंपनी ने दंतेवाड़ा के आलनार इलाके में यह बड़ा फर्जीवाड़ा किया है. कंपनी ने सरकारी दस्तावेजों में दावा किया है कि उसने पिछले 9 साल में 2.75 लाख टन लौह अयस्क निकाला है.
इस फर्जीवाड़े को सच साबित करने के लिए बाकायदा रॉयल्टी की पर्चियां भी काटी गई हैं. परिवहन के लिए पांच ट्रकों का इस्तेमाल बताया गया है. लेकिन जब इस पूरे मामले की जमीनी पड़ताल हुई तो कहानी बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली निकली. जिन ड्राइवरों और गाड़ी मालिकों के नाम कागजों में दर्ज हैं उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं है.
गाड़ी मालिकों और ड्राइवरों को भनक तक नहीं
कागजों में जिन लोगों को ट्रक का ड्राइवर बताया गया है वे असल में कुछ और ही काम करते हैं. घोटपाल के रहने वाले कमलेश का नाम सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है. उसने बताया कि वह लौह अयस्क की गाड़ी चलाता ही नहीं है. वह तो सड़क बनाने का सामान ढोने का काम करता है. उसी गाड़ी के लिए महाराष्ट्र के रहने वाले अरविंद बंसोड़ का नंबर भी दर्ज किया गया है. अरविंद का कहना है कि वह ड्राइवर ही नहीं है और उसे नहीं पता कि उसका नंबर वहां कैसे पहुंचा.
एक और नंबर राजेश मंडावी का मिला जो गाड़ी का मालिक है. राजेश का कहना है कि वह खुद गाड़ी नहीं चलाता और उसे इस खेल की कोई जानकारी नहीं है. राजेश अब अपने नाम और नंबर के गलत इस्तेमाल को लेकर पुलिस से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं. दस्तावेजों में बांगाबाड़ी गीदम बाईपास सड़क बनाने में लगी एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के कुछ ट्रकों का भी नाम है. इन ट्रकों के ड्राइवरों ने भी लौह अयस्क ढोने से साफ इनकार किया है.
खदान तक जाने का कोई रास्ता ही नहीं
आरती स्पंज कंपनी जिस जगह से खनन का दावा कर रही है वहां तक जाने के लिए कोई सड़क ही मौजूद नहीं है. ऐसे में ट्रक पहाड़ तक कैसे पहुंचे यह एक बड़ा सवाल है. इसके साथ ही कंपनी के डंपिंग यार्ड पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. दंतेवाड़ा के कारली में बने इस यार्ड में बहुत पुराना लौह अयस्क का चूरा पड़ा है. इस चूरे पर बड़ी बड़ी झाड़ियां उग आई हैं. इससे साफ पता चलता है कि यहां लंबे समय से कोई नया माल नहीं रखा गया है. जानकारों के मुताबिक आलनार इलाके में मोटे आकार का लौह अयस्क मिलता है लेकिन यार्ड में बिल्कुल बारीक चूरा पड़ा है.
लीज बचाने के लिए रचा गया पूरा खेल
आरती स्पंज कंपनी को 2015 में आलनार के तरल पहाड़ में 31 हेक्टेयर जमीन लीज पर मिली थी. गांव वालों ने शुरू से ही इसका भारी विरोध किया और ग्राम सभा को फर्जी बताया. गांव वालों के विरोध के कारण 2017 में कंपनी वहां काम शुरू नहीं कर पाई. सरकारी नियम है कि अगर कोई कंपनी दो साल तक खनन शुरू नहीं करती है या काम लगातार नहीं करती है तो उसकी लीज खुद ही रद्द हो जाती है. बस इसी लीज को बचाने के लिए कंपनी ने कागजों पर ही खनन और ट्रांसपोर्टिंग का खेल दिखाना शुरू कर दिया.
पुराने मामलों में भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
बैलाडीला इलाके में लौह अयस्क चोरी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. पिछले चार सालों में कई गाड़ियों पर कार्रवाई भी हुई है. पिछले साल भी दो ट्रकों से बड़ी मात्रा में लौह अयस्क पकड़ा गया था. लेकिन आज तक यह साफ नहीं हो पाया है कि चोरी का यह लोहा किन उद्योगों तक पहुंच रहा था. ऐसे में माफिया के हौसले बुलंद हैं.
गांव वालों का फूटा गुस्सा
इस फर्जीवाड़े के खिलाफ अब गांव वाले सड़क पर उतर आए हैं. बस्तरिया राज मोर्चा के बैनर तले आलनार इलाके के लोगों ने बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है. लोग 55 किलोमीटर पैदल चलकर दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं. गांव वालों की मांग है कि कंपनी की लीज तुरंत रद्द की जाए.
दूसरी तरफ दंतेवाड़ा के कलेक्टर देवेश ध्रुव ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम बना दी है. इस टीम में खनन और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी आधार पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
