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CGPSC 2021: सुप्रीम कोर्ट से छत्तीसगढ़ सरकार को करारा झटका, 'जांच के बहाने' अटकी जॉइनिंग का रास्ता साफ
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। सरकार की कोशिश थी कि सीबीआई जांच को ढाल बनाकर CGPSC-2021 के चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग को और लटकाया जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों की हवा निकाल दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। अब सरकार को बिना किसी बहानेबाजी के इन युवाओं को जॉइनिंग लेटर थमाना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को एकदम सही ठहराया है।
गेहूं के साथ घुन पीसने की तैयारी हुई फेल
इसे कहते हैं 'गेहूं के साथ घुन पीसने' की सरकारी जिद का औंधे मुंह गिरना। सरकार का सीधा सा लॉजिक था कि CGPSC में घोटाला हुआ है, जांच चल रही है, इसलिए सबको लाइन में खड़ा रखो। भले ही किसी कैंडिडेट ने रात-दिन एक करके, अपनी मेहनत से एग्जाम निकाला हो और उस पर कोई दाग न हो।
सोचिए, तीन साल से ये युवा जॉइनिंग के लिए सरकारी दफ्तरों की खाक छान रहे थे। हद तो ये है कि 125 लोगों को पहले ही पोस्टिंग मिल चुकी है। बाकी बचे उम्मीदवारों को 'जांच' के नाम पर बेवजह सताया जा रहा था। मानों अपनी मेहनत से एग्जाम पास करना ही इन युवाओं का सबसे बड़ा गुनाह हो गया हो।
कोर्ट में नहीं चला सरकार का बहाना
परेशान होकर डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर चुने गए इन युवाओं ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने सरकार से सीधा सवाल किया कि भई, जिन पर कोई केस ही नहीं है, उनकी नियुक्ति क्यों रोकी है? जवाब में सरकार ने वही पुराना टेप बजा दिया- 'सीबीआई जांच चल रही है।' हाईकोर्ट ने इस गोलमोल जवाब को खारिज करते हुए जॉइनिंग देने का आदेश दिया था।
लेकिन सरकार कहां मानने वाली थी। अपनी जिद में सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जब तक जांच पूरी न हो, नियुक्तियों पर रोक रहनी चाहिए।
इस पर उम्मीदवारों के वकीलों ने कोर्ट को असली तस्वीर दिखा दी। उन्होंने बताया कि सीबीआई तो अपनी फाइनल चार्जशीट पेश कर चुकी है। 171 में से सिर्फ 5 लोगों पर ही गड़बड़ी का आरोप है। तो फिर बाकी साफ-सुथरे उम्मीदवारों का तीन साल से करियर क्यों बर्बाद किया जा रहा है? इस सटीक दलील के आगे सरकार का कोई भी बहाना नहीं टिक पाया।
क्या है बहुचर्चित CGPSC घोटाला?
अब जरा इस घोटाले का फ्लैशबैक भी जान लीजिए। 2020 से 2022 के बीच हुई भर्तियों में आरोप लगा कि आयोग के अफसरों और सफेदपोशों ने अपने 'होनहार' रिश्तेदारों को ही डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी की कुर्सियों पर बैठा दिया। मतलब, आम युवा पढ़-पढ़ कर अपनी आंखें फोड़ता रहे और रसूखदारों के करीबी सीधे राजपत्रित अधिकारी बन जाएं। मामला तूल पकड़ा तो जांच सीबीआई के पाले में डाल दी गई। सीबीआई ने छापे मारे और सबूत बटोरे।
CGPSC-2021 की फैक्ट फाइल:
- कुल पद: 171 पदों के लिए 2021 में परीक्षा हुई।
- प्री-एग्जाम: 13 फरवरी 2022 (2565 पास हुए)।
- मेंस एग्जाम: 26 से 29 मई 2022 (509 पास हुए)।
- फाइनल रिजल्ट: 11 मई 2023 को 170 लोगों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
