CG NEWS: ‘आई लव यू’ कहकर 4 महीने तक पीछा, हाईकोर्ट ने कहा- ये प्यार नहीं, अपराध है

CG NEWS: ‘आई लव यू’ कहकर 4 महीने तक पीछा, हाईकोर्ट ने कहा- ये प्यार नहीं, अपराध है

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नाबालिग से छेड़छाड़ और लगातार पीछा करने (स्टॉकिंग) के एक गंभीर मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि नाबालिग के प्रति इस तरह का व्यवहार कानूनन गंभीर अपराध है, हालांकि लंबे समय तक चले मुकदमे को देखते हुए सजा की अवधि में आंशिक राहत दी गई है।

मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ में हुई, जहां 2016 में निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी अजित राव को भारतीय दंड संहिता की धारा 354(डी) और POCSO एक्ट की धारा 12 के तहत दोषी ठहराया था।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने करीब चार महीने तक 16 वर्षीय स्कूली छात्रा का पीछा किया और रोजाना उसे परेशान करते हुए बार-बार ‘आई लव यू’ कहकर संपर्क बनाने की कोशिश की। इस लगातार व्यवहार से पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। पीड़िता की मां और अन्य गवाहों ने भी इस घटना की पुष्टि की, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत हुआ।

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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की गवाही स्पष्ट, सुसंगत और विश्वसनीय है, जिसमें कोई विरोधाभास नहीं पाया गया। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का आचरण आईपीसी की धारा 354(डी) के तहत स्टॉकिंग की परिभाषा में पूरी तरह आता है, जबकि नाबालिग के प्रति अनचाही यौन टिप्पणी और व्यवहार POCSO एक्ट के तहत दंडनीय है।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो, तो उसे अतिरिक्त पुष्टि की आवश्यकता नहीं होती। बचाव पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि पीड़िता ने झूठा आरोप लगाया है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है और दोषसिद्धि को यथावत रखा जाता है।

हालांकि, लगभग एक दशक तक चले इस मामले को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सजा की अवधि को पहले से काटे गए समय तक सीमित कर दिया है। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना यथावत रहेगा। यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार की स्टॉकिंग या उत्पीड़न को न्यायपालिका गंभीरता से लेती है और ऐसे मामलों में दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा सुनिश्चित की जाती है।

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