जन मन योजना की सड़क पर बड़ा सवाल! दो महीने में धंसा ट्रक, पापड़ की तरह टूटा डामर

जन मन योजना की सड़क पर बड़ा सवाल! दो महीने में धंसा ट्रक, पापड़ की तरह टूटा डामर

कवर्धा। प्रधानमंत्री जन मन योजना के तहत ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दलदली से मेन रोड, खरिया होते हुए अगरी (बी) तक करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सड़क पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। निर्माण पूरा हुए अभी महज दो महीने ही बीते हैं, लेकिन सड़क कई स्थानों पर उखड़ने लगी है। इतना ही नहीं, एक जगह सड़क धंसने से एक भारी ट्रक भी उसमें फंस गया, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। बारिश के बाद सड़क की ऊपरी परत कई जगहों से इस तरह उखड़ रही है मानो डामर पापड़ की तरह टूटकर बिखर रहा हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क से वर्षों तक बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, वह पहली ही मानसूनी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी।

पहली ही बारिश में खुल गई सड़क निर्माण की पोल
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क बनने के कुछ ही सप्ताह बाद जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी थीं। मानसून शुरू होते ही हालात और बिगड़ गए। लगातार बारिश के कारण सड़क की सतह उखड़ने लगी और कई स्थानों पर मिट्टी धंसने से सड़क कमजोर हो गई। हालात तब और गंभीर हो गए जब एक भारी ट्रक सड़क के धंसे हिस्से में फंस गया। इस घटना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। ट्रक निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा।

आवागमन हुआ जोखिमभरा, हादसे की आशंका
सड़क के क्षतिग्रस्त होने से रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह उखड़े डामर और धंसे हिस्सों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो बारिश बढ़ने के साथ स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि रात के समय सड़क की खराब स्थिति के कारण किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

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गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप होता तो नई सड़क इतनी जल्दी खराब नहीं होती। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण एजेंसी, संबंधित अधिकारियों और कार्य की निगरानी करने वाले जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जाए।  किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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दोबारा निर्माण की भी उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि केवल गड्ढे भर देने या पैचवर्क करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनका आग्रह है कि जहां-जहां सड़क पूरी तरह कमजोर हो चुकी है, वहां गुणवत्ता मानकों के अनुरूप दोबारा निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर निगरानी नहीं होगी तो सरकारी धन का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा।

विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, इस पूरे मामले में संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सड़क धंसने और डामर उखड़ने की वजह क्या है, तथा मरम्मत कब तक शुरू की जाएगी। विभाग का पक्ष सामने आने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द तकनीकी जांच कराएगा और सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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