NIA का मेगा ऑपरेशन! दिल्ली समेत 10 राज्यों में 20 ठिकानों पर रेड, ISIS-AQIS के कथित ऑनलाइन नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देशभर में आतंकवाद से जुड़े कथित ऑनलाइन नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए आज दिल्ली समेत 10 राज्यों के 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ की गई है, जिन पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की विचारधारा का ऑनलाइन प्रचार करने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने और आतंकी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क को मजबूत करने का आरोप है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह समन्वित अभियान लंबे समय से जुटाई जा रही खुफिया सूचनाओं और तकनीकी जांच के आधार पर चलाया गया। छापेमारी के दौरान कई स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई है, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने का आरोप
एनआईए की प्रारंभिक जांच के अनुसार, संदिग्ध व्यक्ति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग एप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं तक कट्टरपंथी सामग्री पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन माध्यमों से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ISIS और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। एजेंसी के मुताबिक, कथित तौर पर ऐसे डिजिटल नेटवर्क तैयार किए गए थे, जिनका उद्देश्य युवाओं को चरमपंथी सोच की ओर आकर्षित करना, उन्हें ऑनलाइन प्रभावित करना और आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना था।
हिंसक साजिश और कट्टरपंथी प्रचार की जांच
एनआईए का कहना है कि जांच में ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर आशंका जताई गई कि कुछ संदिग्ध भारत में हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के एजेंडे के अनुरूप लोगों को संगठित करने की कोशिश कर रहे थे। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था, इसमें कितने लोग शामिल थे, उनके आपसी संपर्क किस प्रकार के थे और क्या उनका संबंध किसी विदेशी आतंकी मॉड्यूल या डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी था।
आतंकी फंडिंग, रिक्रूटमेंट और डिजिटल प्रोपेगैंडा पर फोकस
एनआईए के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल ऑनलाइन प्रचार तक सीमित नहीं है। जांच में कथित आतंकी फंडिंग, भर्ती (रिक्रूटमेंट), डिजिटल प्रोपेगैंडा और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के इस्तेमाल जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्धों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही थी, प्रचार सामग्री किस प्रकार तैयार और प्रसारित की जा रही थी तथा क्या इस पूरे नेटवर्क के तार देश के बाहर मौजूद किसी संगठन या व्यक्ति से जुड़े हुए हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की होगी फोरेंसिक जांच
छापेमारी के दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अब विशेषज्ञों द्वारा फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। एजेंसी को उम्मीद है कि इन उपकरणों से चैट रिकॉर्ड, ईमेल, डिजिटल दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं, जो जांच को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी। एनआईए अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आवश्यकता पड़ने पर आगे और पूछताछ, गिरफ्तारियां या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
जांच जारी, आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल, एनआईए पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है। एजेंसी ने अभी तक छापेमारी से जुड़े सभी निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त सामग्री और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क, उसकी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल लोगों की भूमिका के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देश में ऑनलाइन कट्टरपंथ, आतंकी प्रचार और डिजिटल माध्यमों से होने वाली भर्ती पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी रणनीति के तहत ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है।
