441 करोड़ के नालंदा परिसर में बड़ा खेल? अधूरा निर्माण, घटिया सामग्री के आरोपों से मचा बवाल

441 करोड़ के नालंदा परिसर में बड़ा खेल? अधूरा निर्माण, घटिया सामग्री के आरोपों से मचा बवाल

बलौदा बाजार। बलौदा बाजार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बनाई जा रही महत्वाकांक्षी नालंदा परिसर परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। करीब 441 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट को जून तक पूरा होना था, लेकिन नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है। मौके की स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों और छात्रों में नाराजगी बढ़ रही है।

परियोजना की धीमी प्रगति के साथ-साथ निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि नींव निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। लोगों का दावा है कि निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता अपेक्षित स्तर की नहीं है, जिससे भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

आरोप यह भी हैं कि निर्माण स्थल पर पारदर्शिता का अभाव दिखाई दे रहा है। इतने बड़े सरकारी प्रोजेक्ट के बावजूद परियोजना से जुड़ी मूलभूत जानकारी प्रदर्शित करने वाला सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। साथ ही नियमित तकनीकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जिससे लोगों के मन में संदेह और गहरा रहा है।

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नालंदा परिसर को युवाओं के लिए आधुनिक लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट, रीडिंग जोन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस केंद्र के रूप में विकसित किया जाना था। लेकिन निर्माण में देरी और कथित अनियमितताओं के आरोपों ने इस महत्वाकांक्षी योजना की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जिन छात्रों को इस परियोजना से उम्मीदें थीं, वे अब इसके भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि करोड़ों रुपये की परियोजना में शुरुआती चरण से ही अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा, या फिर यह परियोजना भी देरी, लापरवाही और विवादों के बीच उलझकर रह जाएगी? फिलहाल, जवाब का इंतजार छात्रों के साथ-साथ आम जनता भी कर रही है।

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