Bastar Tribal Girls Pilot Training: अब बस्तर की बेटियां भी उड़ाएंगी विमान, इंडिगो देगा पायलट बनने का मौका
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बेटियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब उनके लिए कमर्शियल पायलट बनने का सपना हकीकत में बदल सकता है। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर और स्वावलंबी भारत अभियान के सहयोग से इंडिगो एयरलाइंस की सीएसआर इकाई द्वारा 'Giving Wings to Fly' कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस विशेष पहल का उद्देश्य प्रतिभाशाली छात्राओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह कार्यक्रम उन युवतियों के लिए शुरू किया गया है, जो प्रतिभा और क्षमता होने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पातीं है। चयनित छात्राओं को कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे वे देश के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकें। कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने इसे बस्तर की बेटियों के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए सभी संबद्ध महाविद्यालयों से पात्र छात्राओं की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ने का आग्रह किया है। इस कार्यक्रम में आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का भारतीय महिला होना अनिवार्य है। साथ ही उसकी आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
पात्रता की प्रमुख शर्तें:
- 10+2 में अंग्रेजी, भौतिकी और गणित विषय होना आवश्यक
- प्रत्येक विषय में न्यूनतम 51 प्रतिशत अंक
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का वैध प्रमाण-पत्र
- विमानन क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छुक छात्राएं आवेदन कर सकती हैं
इच्छुक छात्राएं 30 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। आवेदन केवल इंडिगो के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इसके अलावा महाविद्यालयों को भी पात्र छात्राओं का विवरण निर्धारित गूगल फॉर्म के जरिए विश्वविद्यालय को भेजना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल रोजगार का अवसर नहीं है, बल्कि बस्तर की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण जैसी महंगी शिक्षा तक पहुंच बनाकर यह कार्यक्रम ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की छात्राओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। बस्तर की बेटियों को अब सिर्फ सपने देखने की नहीं, बल्कि आसमान में उड़ान भरकर उन्हें पूरा करने की भी ताकत मिलने जा रही है।
