रायपुर में भविष्य के डॉक्टरों की बदहाल व्यवस्था! बिजली बिल नहीं भरा, मेडिकल हॉस्टल की काट दी लाइन, दो दिन तक ब्लैकआउट
रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के अस्थायी छात्रावास में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा एमबीबीएस छात्रों को भुगतना पड़ा। करीब ढाई लाख रुपये का बिजली बिल बकाया रहने के कारण बिजली विभाग ने हॉस्टल का बिजली कनेक्शन काट दिया। परिणामस्वरूप करीब 100 मेडिकल छात्र दो दिनों तक भीषण उमस, अंधेरे और पानी की समस्या से जूझते रहे।
बिजली कटी तो पानी भी हुआ बंद
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर में छात्रों के आंदोलन के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की सहमति से शांति नगर स्थित एक भवन को किराए पर लेकर अस्थायी हॉस्टल बनाया गया था। यहां प्रथम वर्ष से अंतिम वर्ष तक के करीब 100 एमबीबीएस छात्र रह रहे हैं।
गुरुवार को अचानक हॉस्टल की बिजली चली गई। शुरुआत में छात्रों ने इसे सामान्य तकनीकी समस्या समझा, लेकिन लंबे समय तक बिजली बहाल नहीं होने पर उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की। जांच में पता चला कि करीब 2.5 लाख रुपये का बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण विद्युत विभाग ने कनेक्शन काट दिया था। बिजली गुल होने से हॉस्टल में पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई, जिससे छात्रों को पेयजल और दैनिक उपयोग की मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी।
तीन साल बाद भी पूरा नहीं हुआ स्थायी हॉस्टल
मेडिकल कॉलेज परिसर में एमबीबीएस छात्रों के लिए स्थायी छात्रावास का निर्माण करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसी कारण छात्रों को अस्थायी व्यवस्था में रहना पड़ रहा है। इससे पहले भी छात्र किराए के मकानों में रहने को मजबूर थे और इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ उन्हें स्वयं उठाना पड़ता था। विरोध प्रदर्शन के बाद शासन के निर्देश पर कॉलेज प्रबंधन ने दिसंबर में 120 सीट क्षमता वाले किराए के भवन को छात्रावास के रूप में उपलब्ध कराया था।
वार्डन ने दी सफाई
अनुबंधित छात्रावास वार्डन डॉ. प्रशांत जायसवाल ने बताया कि अवकाश के कारण भवन स्वामी समय पर बिजली बिल जमा नहीं कर सके, जिसके चलते विद्युत विभाग ने कनेक्शन काट दिया था। उन्होंने कहा कि अब बिल जमा कर दिया गया है और समस्या का समाधान कर लिया गया है। हालांकि सवाल यह है कि प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाता, तो भविष्य के डॉक्टरों को दो दिनों तक अंधेरे और पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता।
