सिम्स में 'कमीशन' के भेंट चढ़े 24 नए AC: 43 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी में मरीज बेहाल, गोदाम में पड़े AC बने चूहों का स्लिपिंग रूम
बिलासपुर (NJV News)। न्यायधानी बिलासपुर में सूरज इन दिनों आग उगल रहा है और तापमान 43 डिग्री के पार जा चुका है। इस भीषण गर्मी के बीच मरीजों को राहत देने के लिए संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) को सरकार द्वारा 24 नए एयर कंडीशनर (AC) उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन सिस्टम की विडंबना देखिए, ये AC मरीजों के वार्ड में ठंडी हवा देने के बजाय पिछले दो महीनों से सिम्स के गोदाम में धूल फांक रहे हैं और चूहों की शरण स्थली बन चुके हैं। वजह? अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच फंसा कमीशन का पेंच।
रायपुर की फर्म की जिद और मेंटेनेंस का विवाद
इस पूरी बदइंतजामी के पीछे ठेकेदारी और कमीशन का खेल मुख्य कारण है। सूत्रों के मुताबिक, सिम्स को AC सप्लाई करने का टेंडर रायपुर की एक फर्म को मिला है। नियम के तहत सप्लाई के बाद इन्हें तत्काल इंस्टॉल किया जाना था। लेकिन रायपुर की सप्लाई करने वाली फर्म अब इस बात पर अड़ी है कि AC की फिटिंग और भविष्य के मेंटेनेंस का कार्य भी उसी को दिया जाए।
दूसरी तरफ, तकनीकी पेंच यह है कि सिम्स में अस्पताल के मेंटेनेंस का ठेका सरकार की ओर से पहले ही किसी अन्य ठेकेदार को दिया जा चुका है। इसी 'कमीशन और अधिकार' की लड़ाई के चलते मेंटेनेंस वाले अधिकृत ठेकेदार को काम करने से रोक दिया गया है। दोनों पक्षों की इस खींचतान में 24 नए AC डिब्बों में ही कैद होकर रह गए हैं।
AC के डब्बे बने चूहों का '5 स्टार' होटल
प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि लाखों रुपये के सरकारी उपकरण कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। सिम्स के गोदाम में पिछले 2 महीने से रखे इन AC के डब्बों में अब चूहों ने अपना पक्का बसेरा बना लिया है। चूहे बड़े आराम से इन डब्बों के अंदर घुसकर रह रहे हैं और संभवतः वायरिंग को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जो AC मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए लाए गए थे, वे अब चूहों की जागीर बन गए हैं। वहीं, सिम्स के जिम्मेदार अधिकारी अपने वातानुकूलित (AC) चैंबरों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। उनका ध्यान व्यवस्था सुधारने पर नहीं, बल्कि अपना स्वार्थ और कमीशन सेट करने पर टिका हुआ है।
43 डिग्री की आंच में उबल रहे मरीज और कर्मचारी
बिलासपुर का पारा 43 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। इस झुलसाने वाली गर्मी में सिम्स के वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का हाल बेहाल है। गर्मी और उमस के कारण मरीज उबल रहे हैं। सिर्फ मरीज ही नहीं, अस्पताल के कई कर्मचारी भी इस भीषण गर्मी में उसन रहे हैं और पसीने से तर-बतर होकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। प्रबंधन की यह घोर लापरवाही अब मरीजों की जान के लिए सीधा खतरा बनती जा रही है।
दूसरे अस्पतालों में कूलर तक नसीब नहीं
सिम्स में जहां 24 नए AC डब्बों में बंद पड़े हैं, वहीं जिले के अन्य अस्पतालों की स्थिति और भी रुलाने वाली है। बिलासपुर के जिला अस्पताल और जिला आयुर्वेद अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में AC की भारी कमी है। हालात ये हैं कि यहां मरीज एक अदद कूलर के लिए भी तरस रहे हैं।
NGV के सवाल....
क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को सिम्स की यह मनमानी नजर नहीं आ रही है?
जिम्मेदारी किसकी: डब्बों में रखे-रखे अगर ये AC चूहों द्वारा कबाड़ में तब्दील कर दिए गए, तो इसकी भरपाई किस अधिकारी के वेतन से की जाएगी?
मरीज गर्मी से तड़प रहे हैं और प्रशासन का ध्यान इस तरफ बिल्कुल नहीं है। स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है और आम जनता सिस्टम की बेरुखी का संताप झेलने को मजबूर है।
