12 शिक्षकों के भरोसे 200 बच्चों की पढ़ाई! गुस्साए ग्रामीणों ने तीनों स्कूलों में जड़ा ताला, प्रशासन को दौड़कर पहुंचना पड़ा

12 शिक्षकों के भरोसे 200 बच्चों की पढ़ाई! गुस्साए ग्रामीणों ने तीनों स्कूलों में जड़ा ताला, प्रशासन को दौड़कर पहुंचना पड़ा

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के लिमोरा गांव में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आज खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से मांगें पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों और पालकों ने प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेंडरी स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। अचानक हुई तालाबंदी से स्कूल का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हुआ और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। मजबूर होकर उन्हें विरोध का यह रास्ता अपनाना पड़ा।

200 विद्यार्थियों के लिए केवल 12 शिक्षक 
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के तीनों स्कूलों में मिलाकर करीब 200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि पूरे परिसर में पढ़ाने के लिए सिर्फ 12 शिक्षक ही उपलब्ध हैं। ऐसे में कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं और एक-एक शिक्षक को कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। पालकों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है।

कई बार शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पिछले कई महीनों से शिक्षा विभाग को लगातार ज्ञापन और शिकायतें दीं। अधिकारियों से अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की मांग भी की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जब बार-बार आग्रह के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही, तब विरोध स्वरूप स्कूल में तालाबंदी का निर्णय लिया गया।

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मौके पर पहुंचे अधिकारी, समझाइश का प्रयास
स्कूल में तालाबंदी की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों, पालकों और स्कूल प्रबंधन से चर्चा कर स्थिति सामान्य बनाने का प्रयास किया। विभागीय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शिक्षकों की कमी के संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जल्द से जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति या व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से संचालित हो सके। फिलहाल, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत जारी है। सभी की नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।

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