संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह विधिक सबूत का स्थान नहीं ले सकता, ठोस साक्ष्य के आभाव में आरोपी हुआ दोषमुक्त

संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह विधिक सबूत का स्थान नहीं ले सकता, ठोस साक्ष्य के आभाव में आरोपी हुआ दोषमुक्त

बिलासपुर : सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए विशेष न्यायाधीश एनआईए कोर्ट सिराजुद्दीन कुरैशी ने कहा, संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह विधिक सबूत का स्थान नहीं ले सकता। किसी भी व्यक्ति को केवल नैतिक आधार या अनुमान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। एनआईए कोर्ट बिलासपुर ने 3 करोड़ 80 लाख रुपये के नकली नोटों के परिवहन और दुर्व्यापार के मामले में आरोपी डोमेन्द्र महिपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह असफल रहा।

31 जनवरी 2024 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सारंगढ़ की ओर से एक पिकअप सीजी 13 एयू 4670 में नकली नोटों का परिवहन किया जा रहा है। सरायपाली के अग्रसेन चौक पर नाकाबंदी कर पुलिस ने वाहन को पकड़ा। वाहन चालक अरुण सिदार की निशानदेही पर पिकअप के डाले में साड़ियों के नीचे छिपाकर रखी गईं 4 प्लास्टिक बोरियों से 500-500 रुपये के कुल 3 करोड़ 80 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए गए थे। वाहन चालक अरुण सिंह सिदार के साथ पुलिस ने प्यारेलाल कुर्रे, विजय कुमार बर्मन और लखेश्वर प्रसाद दुबे को भी पकड़ा था। घटना के बाद से फरार चल रहे आरोपी डोमेन्द्र महिपाल (उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम औसर, जिला दुर्ग) को पुलिस ने 18 मई 2025 को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ अलग पूरक अभियोग पत्र अदालत में पेश किया था।

बयान से नुकर गया गवाह 

Read More बिजली व्यवस्था सुधारने चेयरमैन सुबोध सिंह एक्शन मोड में : तुरंत दिए 10 करोड़, मंगला और कोनी में बनेंगे नए जोन

विवेचना अधिकारी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया कि आरोपी डोमेन्द्र महिपाल के कब्जे से किसी भी प्रकार के नकली नोट या अन्य साक्ष्य की कोई जब्ती नहीं हुई है। मेमोरेण्डम कथन का स्वतंत्र गवाह केशव चौहान, अदालत में अपने बयान से मुकर गया और उसने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन भी नहीं किया। पुलिस ने आरोपी डोमेन्द्र महिपाल का अन्य मुख्य आरोपियों के साथ कोई बातचीत या संबंध साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकार्ड या बैंक खातों का विवरण अदालत में पेश नहीं कर पाया।

Read More जिस बहु को घर की लक्ष्मी बनाया , वही निकली ह-त्यारन

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए विशेष न्यायाधीश एनआईए कोर्ट सिराजुद्दीन कुरैशी ने कहा कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह विधिक सबूत का स्थान नहीं ले सकता। किसी भी व्यक्ति को केवल नैतिक आधार या अनुमान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन, आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा है। एनआईए कोर्ट ने आरोपी डोमेन्द्र महिपाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बता दें, इस प्रकरण के अन्य सह-आरोपियों अरुण सिंह सिदार, प्यारेलाल कुर्रे, विजय कुमार बर्मन और लखेश्वर प्रसाद दुबे को एनआईए कोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को दोषमुक्त कर दिया था।

 

Tags:

Latest News

बिलासपुर हाई कोर्ट  : लोक आयोग जांच से जुड़े साक्ष्य आरटीआई के दायरे में नहीं बिलासपुर हाई कोर्ट : लोक आयोग जांच से जुड़े साक्ष्य आरटीआई के दायरे में नहीं
संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह विधिक सबूत का स्थान नहीं ले सकता, ठोस साक्ष्य के आभाव में आरोपी हुआ दोषमुक्त
न सड़क... न एंबुलेंस! दरवाजा बना स्ट्रेचर, बाढ़ के बीच गर्भवती को ऐसे पहुंचाया अस्पताल, सुरक्षित हुआ प्रसव
हाई कोर्ट ने कहा - आंधी, तूफान, बाढ़ जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों में हुई मौत भी मानी जायेगी प्राकृतिक आपदा , देना होगा 4 लाख का मुआवजा
रायपुर में चोर की अजीब पसंद! सिर्फ ब्रांडेड जूतों पर साफ कर रहा हाथ, CCTV से तलाश तेज
रायपुर के स्पा सेंटरों में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश! CCTV से रिकॉर्ड तक खंगाले, नियम तोड़ने वालों को सख्त चेतावनी
शादी की खुशियाँ मातम में बदली, टीवी खरीदने गए युवक की मौत, एक गंभीर रूप से घायल
12 शिक्षकों के भरोसे 200 बच्चों की पढ़ाई! गुस्साए ग्रामीणों ने तीनों स्कूलों में जड़ा ताला, प्रशासन को दौड़कर पहुंचना पड़ा
राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका! चेक बाउंस मामले में सजा के खिलाफ अपील खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार
जर्जर सरकारी दफ्तर ने खोली सिस्टम की पोल! कामकाज के बीच भरभराकर गिरी छत, परियोजना अधिकारी समेत 3 घायल
जिला अस्पताल के फर्स पर बहता रहा भाजपा नेता का खून, परिजनों का हंगामा
जिस दुल्हे को थप्पड़ मार कर वापस लौटाया, उसी से दुबारा कर ली शादी