बिलासपुर हाई कोर्ट : लोक आयोग जांच से जुड़े साक्ष्य आरटीआई के दायरे में नहीं

बिलासपुर हाई कोर्ट  : लोक आयोग जांच से जुड़े साक्ष्य आरटीआई के दायरे में नहीं

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कहा कि लोक आयोग की जांच से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों को आरटीआई के तहत तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, जब तक कि दोनों कानूनों के प्रावधानों में कोई सीधा और स्पष्ट विरोधाभास न हो। हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 और छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 के टकराव को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को पूरी तरह से अवैध और क्षेत्राधिकार से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया है। 

संजीव कुमार ने वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ लोक आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि  सिम्स में वर्ष 2013-14 के दौरान की गई सीधी भर्ती में गड़बड़ी और अनियमितता बरती गई है। अप्रैल 2018 में छत्तीसगढ़ बिलासपुर के सोमराज श्रीवास्तव ने लोक आयोग में आरटीआई के तहत आवेदन दिया। इसमें संजीव कुमार की शिकायत, लोक आयोग द्वारा की गई कार्यवाही और इस संबंध में पारित अंतिम आदेश की कॉपी की मांग की गई थी। मई 2018 में लोक आयोग के जनसूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। बताया कि  छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा 14 के तहत जांच से जुड़ी सामग्रियां गोपनीय होती हैं। साथ ही, इसे आरटीआई एक्ट की धारा 8 (1) (जी) और 8 (1) (एच) के तहत भी छूट प्राप्त है। जन सूचना अधिकारी ने बताया, जांच प्रक्रिया और गवाहों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण जानकारी नहीं दी जा सकती।

सोमराज ने इस फैसले के खिलाफ लोक आयोग के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील की। अपीलीय प्राधिकारी ने जनसूचना अधिकारी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि जानकारी गोपनीय है और इसे साझा नहीं किया जा सकता।

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याचिका की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 22 इसे अन्य कानूनों पर प्राथमिकता जरूर देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसने छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम, 2002 की धारा 14(1) में दिए गए गोपनीयता के प्रावधान को निरस्त या खत्म कर दिया है। दोनों कानून अपनी-अपनी जगह तब तक पूरी तरह लागू रहेंगे जब तक कि उनमें कोई सीधा और स्पष्ट विरोधाभास न दिखाई दे।

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हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था, लोक आयोग द्वारा जांच पूरी कर मामला निपटा दिए जाने के कारण अब गोपनीयता की धारा 14 या आरटीआई की धारा 8 (1) (एच) लागू नहीं होगी।

 

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