Rice Mill Scam: हजारों क्विंटल धान कम मिलने के बाद अब फाइल भी गायब, प्रशासन में मचा हड़कंप

करनाल। करनाल में करोड़ों रुपये के धान घोटाले से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लघु सचिवालय स्थित डीसी ऑफिस की आरकेई ब्रांच से अहम फाइल रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। इस घटना ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि गायब हुई फाइल में धान घोटाले से संबंधित फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट शामिल थी, जो जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही थी। फाइल गायब होने की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत शाखा में जांच शुरू कर दी गई। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि फाइल को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा “बाई हैंड” ले जाया गया। हालांकि, इस बात की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वह व्यक्ति कौन था और उसे फाइल किसने सौंपी।

इस फाइल के आधार पर पहले ही दो मंडी सचिवों और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के चार इंस्पेक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने डीएसपी राजीव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो पूरे प्रकरण की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। वहीं, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने भी अपने स्तर पर विभागीय जांच शुरू कर दी है। इस जांच की जिम्मेदारी भिवानी के डीएफएससी अपर तिवारी को सौंपी गई है, जो यह पता लगाएंगे कि अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत इस घोटाले में कितनी भूमिका निभाती है।

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दिलचस्प बात यह है कि फाइल गायब होने का खुलासा उसी समय हुआ जब डीएफएससी अपर तिवारी जांच के सिलसिले में करनाल पहुंचे और उन्होंने संबंधित राइस मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट मांगी। जब विभाग ने बताया कि फाइल डीसी ऑफिस में है, तो वहां जाकर पता चला कि वह पहले ही गायब हो चुकी है।

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इसके बाद जांच टीम ने एसडीएम कार्यालय से दस्तावेजों की प्रतिलिपियां हासिल कर अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई, लेकिन मूल फाइल का गायब होना जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी साध ली गई है। डीसी उत्तम सिंह से जब इस गंभीर मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

धान घोटाले की बात करें तो सलारू गांव स्थित बत्तान फूड्स राइस मिल को 25,129.87 क्विंटल धान आवंटित किया गया था। अक्टूबर 2025 में हुई फिजिकल वेरिफिकेशन में करीब 12,659.62 क्विंटल धान कम पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.54 करोड़ रुपये बताई गई थी।

इस मामले में मिल संचालक समेत चार निरीक्षकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था और फिलहाल सभी आरोपी इंस्पेक्टर निलंबित चल रहे हैं। अब फाइल गायब होने की घटना ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है, जिससे जांच की दिशा और निष्कर्ष दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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