Rajasthan Nikay Chunav Result 2026: राजस्थान के शहरों में खिला ‘कमल’, 309 निकायों में BJP का दबदबा; कांग्रेस 103 पर, निर्दलीयों ने भी दिखाया दम
जयपुर। राजस्थान की शहरी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। नगर निकाय चुनाव के सामने आए नतीजों में भाजपा ने 309 निकायों में से 163 में जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम किया है। कांग्रेस को 103 निकायों में सफलता मिली, जबकि 43 जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारकर भाजपा-कांग्रेस दोनों के समीकरणों को दिलचस्प बना दिया।
राजस्थान में इस बार 309 शहरी निकायों के लिए चुनाव हुए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं। 14 सितंबर की सुबह मतगणना शुरू होने के साथ ही अलग-अलग शहरों से नतीजे सामने आने लगे और तस्वीर भाजपा के पक्ष में जाती दिखाई दी।
शहरों की सियासत में BJP ने बनाई बढ़त
निकाय चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं। विधानसभा की सत्ता में आने के बाद भाजपा के सामने शहरी निकायों में अपनी पकड़ साबित करने की चुनौती थी। 163 निकायों में मिली सफलता ने पार्टी को कांग्रेस के मुकाबले स्पष्ट बढ़त दी है।
वहीं कांग्रेस ने भी 103 निकायों में जीत हासिल कर शहरी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। चुनाव का तीसरा महत्वपूर्ण पक्ष निर्दलीय रहे, जिन्होंने 43 निकायों में जीत हासिल की। ऐसे में कई स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में निर्दलीय चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
दो चरणों में जनता ने सुनाया फैसला
राजस्थान में निकाय चुनाव दो चरणों में कराए गए थे। 9 और 11 सितंबर को मतदान के बाद 14 सितंबर को मतगणना हुई। इस चुनाव में हजारों वार्डों के लिए प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई। चुनाव से पहले ही 77 प्रत्याशी निर्विरोध चुने जा चुके थे, जिनमें 44 भाजपा और 16 कांग्रेस से थे।
भजनलाल सरकार के लिए नतीजों के क्या हैं मायने?
निकाय चुनाव को राजस्थान की शहरी राजनीति में भाजपा और कांग्रेस की जमीनी ताकत की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था। चुनाव से पहले भी 309 निकायों के इस मुकाबले को दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक टेस्ट माना गया था।
भाजपा के लिए यह प्रदर्शन राज्य सरकार की राजनीतिक स्थिति को मजबूती देने वाला माना जा सकता है, जबकि कांग्रेस के सामने अब उन शहरी क्षेत्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने की चुनौती होगी जहां वह भाजपा से पीछे रही। साथ ही 43 निकायों में निर्दलीयों की सफलता यह भी बताती है कि स्थानीय चुनावों में पार्टी के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय मुद्दों का असर भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
