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चमक पड़ी फीकी: चांदी में एक घंटे में 21,500 की ऐतिहासिक गिरावट, जानें क्यों हुआ क्रैश?
दिल्ली: पिछले हफ्ते लगातार नए रिकॉर्ड बना रही चांदी आज अचानक तेज दबाव में आ गई। ढाई लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छूते ही कीमतों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। महज़ एक घंटे के भीतर चांदी 21,000 रुपये से अधिक टूट गई। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फिसलकर 2,33,120 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिससे बाजार में निवेशक हैरान रह गए।
अब बड़ा सवाल यह है कि चांदी में इतनी तेज गिरावट क्यों आई? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यह गिरावट किसी एक वजह का नतीजा नहीं है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जबकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों में नरमी आने से सेफ-हेवन डिमांड में भी अचानक कमी देखी गई। इन दोनों फैक्टर्स ने मिलकर चांदी की कीमतों पर तेज दबाव बना दिया।
MCX पर भारी गिरावट, 5300 रुपए तक गिरे दाम
खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी 2,34,400 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। पिछले दिन के मुकाबले इसमें 2.25 फीसदी यानी 5387 रुपए की गिरावट आई। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,39,787 रुपए (silver rate today) पर क्लोज हुई थी।
खास बात यह है कि आज सुबह मार्केट खुलते ही चांदी में अचानक तेजी आई और कीमत 2,54,174 रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुचं गई। लेकिन 1 बजे के आसपास इसमें तेजी से गिरावट (silver price crash) आई और 2.34 लाख के आसपास कारोबार करने लगी। यानी चांदी में 21,500 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।
रूस-यूक्रेन युद्धविराम के संकेतों ने गिराई कीमत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही तस्वीर दिखी। चांदी पहली बार उथल-पुथल भरे कारोबार में 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन बाद में 75 डॉलर के नीचे फिसल गई। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेंलेंस्की (Volodymyr Zelensky) के बीच युद्धविराम को लेकर 'काफी करीब' पहुंचने की बात। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष यानी रूस और यूक्रेन की शांति वार्ता 'बहुत करीब' है, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर पड़ी।
MCX पर आई इस तेज गिरावट को बुलियन मार्केट में ब्रॉड प्रॉफिट बुकिंग का हिस्सा माना जा रहा है। रिलायंस सिक्योरिटीज (Reliance Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी कहते हैं कि, "ट्रेंड अब भी पॉजिटिव है, लेकिन उतार-चढ़ाव तेज रहेगा। 2.40 लाख चांदी के लिए नजदीकी सपोर्ट है।"
वहीं अमेरिकी फर्म BTIG ने चेताया कि कीमती धातुएं पैराबॉलिक हो चुकी हैं। फर्म का कहना है कि, "ऐसी तेजी आमतौर पर समय लेकर नहीं, बल्कि तेज डाउनसाइड रिएक्शन के साथ खत्म होती है।" तकनीकी चार्ट पर चांदी 200-DMA से करीब 89% ऊपर थी- इतिहास बताता है कि ऐसी स्थिति में आगे के हफ्तों में कीमतें अक्सर नीचे आती हैं।
'10% हाई के बाद 25% गिरी चांदी'
BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की (Jonathan Krinsky) ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर 10% की एक दिन की छलांग लगाई, उसके बाद 25% तक की गिरावट भी देखी गई। ICICI Prudential Mutual Fund के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया भी मानते हैं कि, "इतनी शानदार रैलियां अक्सर नरमी से नहीं, झटके से ठंडी पड़ती हैं।"
हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, गिरावट के बाद चांदी ने 80 डॉलर के आसपास तेज रिबाउंड भी दिखाया। मध्य-पूर्व तनाव, अमेरिका-वेनेजुएला खींचतान और दरों में कटौती की उम्मीदें अब भी कीमतों को सहारा दे रही हैं। लंबी अवधि में सप्लाई की कमी, कम इन्वेंट्री और औद्योगिक मांग के चलते ट्रेंड मजबूत है। लेकिन फिलहाल, तेज उतार-चढ़ाव ही नई हकीकत है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
