मध्यप्रदेश में नारी सुरक्षा पर गहराता संकट: 6 साल में 2.70 लाख महिलाएं और बेटियां लापता, हर घंटे गायब हो रहीं 5 लड़कियां

मध्यप्रदेश में नारी सुरक्षा पर गहराता संकट: 6 साल में 2.70 लाख महिलाएं और बेटियां लापता, हर घंटे गायब हो रहीं 5 लड़कियां

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट ने प्रदेश में महिला सुरक्षा की दावों की पोल खोलकर रख दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न जिलों से कुल 2 लाख 70 हजार 300 महिलाएं और बेटियां लापता हुई हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस इनमें से 50 हजार से अधिक महिलाओं और बालिकाओं का अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा: प्रतिदिन औसतन 125 गायब

कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया द्वारा पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गृह विभाग ने यह चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। विश्लेषण करें तो प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 125 महिलाएं और बेटियां गायब हो रही हैं, यानी हर एक घंटे में 5 घर अपनी बेटियों या बहुओं को खो रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि 47,984 महिलाएं और 2,186 बालिकाएं अब भी पुलिस रिकॉर्ड में ‘लापता’ श्रेणी में दर्ज हैं।

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वजह का विश्लेषण नहीं: आखिर कहां जा रही हैं महिलाएं?

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रिपोर्ट में बालिकाओं के गायब होने के पीछे 48 प्रतिशत मामलों में ‘घर से नाराज होकर जाना’ बताया गया है। हालांकि, वयस्क महिलाओं के गायब होने के मामलों में पुलिस मुख्यालय के पास कोई पुख्ता राज्यस्तरीय विश्लेषण उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ इसे मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) और संगठित अपराध की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि लापता होने का ग्राफ प्रतिवर्ष 4 से 8 हजार की दर से बढ़ रहा है।

वर्षवार लापता होने के आंकड़े (2020-2026)
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वर्तमान स्थिति का तुलनात्मक विवरण

 महिलाओं की स्थिति (व्यस्क):

कुल लापता महिलाओं की संख्या 2,06,507 दर्ज की गई, जिनमें से 1,58,523 या तो स्वयं लौट आईं या पुलिस द्वारा खोज ली गईं। शेष 47,984 महिलाओं का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है।

बालिकाओं की स्थिति (नाबालिग):

कुल 63,793 बालिकाएं गायब हुईं, जिनमें से परिजनों और पुलिस के प्रयासों से 61,607 को ढूंढ लिया गया। लेकिन 2,186 बेटियां आज भी अपनों से दूर हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्ष ने इन आंकड़ों को प्रदेश के लिए ‘कलंक’ बताया है। डॉ. विक्रांत भूरिया ने कहा कि जब हर घंटे पांच बेटियां गायब हो रही हैं, तो सरकार की सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं? विशेष रूप से उन 50 हजार से अधिक मामलों में पुलिस की विफलता बड़ी चिंता का विषय है जो वर्षों से लंबित हैं।

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