NCERT विवाद पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़: माफी के बावजूद नहीं थमा मामला, जिम्मेदारों पर सवाल

NCERT विवाद पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़: माफी के बावजूद नहीं थमा मामला, जिम्मेदारों पर सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में शामिल “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक अध्याय को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई जारी रखी है। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. Vinod Chandran (संदर्भानुसार) शामिल हैं। सीजेआई की कड़ी नाराजगी के बाद National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने विवादित किताब को बाजार से वापस लेने का फैसला किया है और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी भी मांगी है।

न्यायपालिका की गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित सामग्री न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली प्रतीत होती है। उन्होंने टिप्पणी की कि यह “न्यायपालिका की गरिमा को कम करने का एक सोचा-समझा प्रयास” लगता है। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि जब तक अदालत पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

NCERT की ओर से बिना शर्त माफी
NCERT की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कोर्ट में कहा कि परिषद इस मामले में बिना शर्त माफी मांगती है और भविष्य में ऐसी त्रुटि दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाजार में जारी की गई कुल 32 पुस्तकों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि विशेषज्ञ समिति पूरे अध्याय की दोबारा समीक्षा करेगी।

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‘Justice Delayed is Justice Denied’ पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान पाठ्यपुस्तक में शामिल न्यायिक लंबित मामलों (pendency) से जुड़े हिस्से पर भी चर्चा हुई। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि छात्रों को इस तरह का संदेश नहीं दिया जा सकता जिससे न्याय व्यवस्था पर अविश्वास पैदा हो। इस पर सीजेआई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और विवादित सामग्री पहले ही सार्वजनिक क्षेत्र में पहुंच चुकी है।

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मामले पर आगे भी जारी रहेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि शिक्षा सामग्री में संस्थाओं की छवि और संवैधानिक मूल्यों के संतुलन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल, कोर्ट इस पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहा है।

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