पंजाब के 304 करोड़ स्कॉलरशिप घोटाले में बड़ा एक्शन: हाई कोर्ट की फटकार के बाद 6 पूर्व अधिकारियों पर FIR, विजिलेंस की छापेमारी शुरू

पंजाब के 304 करोड़ स्कॉलरशिप घोटाले में बड़ा एक्शन: हाई कोर्ट की फटकार के बाद 6 पूर्व अधिकारियों पर FIR, विजिलेंस की छापेमारी शुरू

चंडीगढ़। Punjab के बहुचर्चित 304 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में आखिरकार बड़ा कानूनी एक्शन शुरू हो गया है। वर्षों तक चली जांच और लगातार उठते सवालों के बाद Punjab Vigilance Bureau ने छह पूर्व अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई Punjab and Haryana High Court की उस कड़ी टिप्पणी के बाद हुई, जिसमें जांच में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताई गई थी। मामला अनुसूचित जाति छात्रों के लिए चलाई गई पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है।

जांच के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2016-17 के दौरान छात्रवृत्ति राशि जारी करने में बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने ‘पिक एंड चूज’ नीति अपनाते हुए कुछ निजी शिक्षण संस्थानों को अवैध लाभ पहुंचाया। कई अपात्र संस्थानों को करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए, जबकि कुछ कॉलेजों को तय सीमा से कई गुना अधिक भुगतान किया गया। उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन संस्थानों के खिलाफ पहले से ऑडिट आपत्तियां थीं, उन्हें भी दोबारा भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

Aam Aadmi Party सरकार ने वर्ष 2023 में इस पूरे मामले को विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा था, लेकिन करीब तीन साल तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा। अब विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत पूर्व अधिकारियों परमिंदर सिंह गिल, चरणजीत सिंह, मुकेश भाटिया, राजिंदर चोपड़ा, राकेश अरोड़ा और बलदेव सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन अधिकारियों को पहले ही विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।

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जांच में दस्तावेजों से छेड़छाड़, नोटशीट में बदलाव और फर्जी भुगतान जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मामलों में पहले से भुगतान प्राप्त संस्थानों को दोबारा रकम जारी की गई। फाइलों से महत्वपूर्ण टिप्पणियां हटाने और रिकॉर्ड बदलने जैसी अनियमितताओं के भी प्रमाण मिले हैं। हालांकि उच्चस्तरीय समिति ने तत्कालीन मंत्री Sadhu Singh Dharamsot को क्लीन चिट दी थी, लेकिन विपक्ष अब भी राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग उठा रहा है।

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एफआईआर दर्ज होने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच करेंगी। माना जा रहा है कि इतने वर्षों बाद दर्ज हुई यह एफआईआर घोटाले की जांच को नई दिशा दे सकती है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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