छत्तीसगढ़ में अफसरों की लग्जरी गाड़ियों पर लुट रहा खजाना, दिल्ली-UP ने की कटौती, यहां 75 हजार तक मासिक किराया

छत्तीसगढ़ में अफसरों की लग्जरी गाड़ियों पर लुट रहा खजाना, दिल्ली-UP ने की कटौती, यहां 75 हजार तक मासिक किराया

प्रमुख हाइलाइट्स
  •   दिल्ली और यूपी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में खर्च कटौती की अब तक कोई गाइडलाइन नहीं।
  •   प्रति 2000 किमी लग्जरी गाड़ियों का किराया 75 हजार रुपए तक, खजाने पर भारी बोझ।
  •   नियम ताक पर: 'जितने विभाग उतनी गाड़ियां' की परंपरा, एक अफसर पर 4-5 वाहनों का खर्च।
  •   ईंधन बचाने कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने सरकार से की 'वर्क-फ्रॉम-होम' लागू करने की मांग।

रायपुर। प्रधानमंत्री की अपील के बाद देश के कई राज्यों ने सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली और उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों ने सरकारी वाहनों के उपयोग और ईंधन खर्च पर लगाम कसी है। लेकिन, छत्तीसगढ़ की अफसरशाही में अब तक इस दिशा में कोई सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। राज्य के कुछ मंत्रियों ने भले ही अनौपचारिक तौर पर अपने स्तर पर अनावश्यक दौरे कम करने और बैठकों को ऑनलाइन करने की पहल शुरू की हो, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी अब भी पुरानी ढर्रे पर ही चल रही है।

राज्य में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) या वित्त विभाग की ओर से अब तक ऐसी कोई नई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिसमें सरकारी वाहनों के उपयोग या अधिकारियों की यात्रा व्यवस्था को लेकर खर्च में कटौती के स्पष्ट निर्देश हों।

लग्जरी गाड़ियों का भारी-भरकम किराया

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छत्तीसगढ़ में वर्तमान में करीब 58 विभाग हैं और लगभग हर विभाग में 3 से 4 गाड़ियां किराए पर दौड़ रही हैं। अफसरों की लग्जरी गाड़ियों के लिए हर महीने 75 हजार रुपए तक का भारी-भरकम किराया चुकाया जा रहा है। यह दर हर महीने 2000 किलोमीटर के लिए तय की गई है। राज्य में सबसे कम मासिक किराया भी 54 हजार रुपए तय है, लेकिन अधिकांश विभागों में महंगी गाड़ियों का ही क्रेज देखा जा रहा है।

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जितने विभाग, उतनी गाड़ियां' की परंपरा

राज्य के प्रशासनिक गलियारों में एक अजीबोगरीब परंपरा हावी है- 'जितने विभाग, उतनी गाड़ियां'। सूत्रों की मानें तो कई मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अफसरों के पास जितने विभागों का प्रभार होता है, वे उन सभी विभागों से अपने लिए अलग-अलग गाड़ियों की व्यवस्था करते हैं। कई बार तो एक अधिकारी या मंत्री के पास चार से पांच गाड़ियां तक होती हैं। ये गाड़ियां उनके आधिकारिक काफिले से अलग होती हैं और इनका उपयोग अक्सर अन्य लोगों द्वारा किया जाता है। इसका सीधा बिल संबंधित विभाग भरते हैं।

स्टेट गैरेज के अलावा भी किराए का खेल

जानकारी के मुताबिक, स्टेट गैरेज में पहले से ही करीब 182 गाड़ियां उपलब्ध हैं। इन गाड़ियों का उपयोग मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्यों, राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त नेताओं और मुख्य सचिव से लेकर ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों के लिए होता है। इसके बावजूद, वित्त विभाग की गाइडलाइन और निर्देशों की अनदेखी करते हुए कई विभाग अपने स्तर पर किराए की गाड़ियां सरपट दौड़ा रहे हैं। जिलों में भी अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन संचालित हो रहे हैं। यदि सरकार वाहन पूल सिस्टम या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर सख्ती करती है, तो सरकारी खजाने पर पड़ने वाला करोड़ों का दबाव कम हो सकता है।

ईंधन बचाने फेडरेशन ने मांगा वर्क-फ्रॉम-होम

मौजूदा हालात और प्रधानमंत्री की अपील को देखते हुए छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने भी मितव्ययिता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को बाकायदा पत्र लिखकर शासकीय कार्यालयों में 'वर्क-फ्रॉम-होम' लागू करने की मांग की है।

फेडरेशन का स्पष्ट तर्क है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही ई-ऑफिस और पेपरलेस कार्यप्रणाली लागू की जा चुकी है, जिसके माध्यम से अधिकांश प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन ही संपन्न हो रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता अनुसार चरणबद्ध तरीके से 'वर्क-फ्रॉम-होम' व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे न केवल अनावश्यक प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी, बल्कि करोड़ों रुपए के सरकारी ईंधन की भी बड़ी बचत होगी। 

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