अरावली हिल्स में नई माइनिंग लीज़ पर केंद्र सरकार की सख्ती, राज्यों को पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश

अरावली हिल्स में नई माइनिंग लीज़ पर केंद्र सरकार की सख्ती, राज्यों को पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश

नई दिल्ली। अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली हिल्स क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज़ पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश दिया है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय गुजरात से लेकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला की भौगोलिक, पारिस्थितिक और पर्यावरणीय अखंडता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि अनियंत्रित खनन गतिविधियों से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है, बल्कि जल स्रोतों, जैव विविधता और क्षेत्रीय जलवायु पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

अरावली की नई परिभाषा पर विवाद के बीच फैसला
हाल के महीनों में अरावली हिल्स की भौगोलिक परिभाषा को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच मतभेद सामने आए थे। इसी संदर्भ में मंत्रालय ने यह स्पष्ट निर्देश जारी कर दिया है कि परिभाषा से इतर, अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार की नई खनन गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।

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राज्यों से कड़ाई से पालन के निर्देश
केंद्र ने सभी संबंधित राज्यों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए और किसी भी स्तर पर नई माइनिंग लीज़ स्वीकृत न की जाए। साथ ही, मौजूदा गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।

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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है। अरावली न केवल उत्तर भारत के लिए एक प्राकृतिक हरित कवच है, बल्कि यह मरुस्थलीकरण को रोकने, भूजल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाती है।

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