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Breaking: फर्जी पहचान बनाकर भारत में घूमता रहा आतंकी, आखिरकार 7 साल बाद पुलिस के शिकंजे में
नई दिल्ली। दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां लंबे समय से फरार चल रहे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया गया है। राजधानी में सक्रिय मॉड्यूल के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी ने सुरक्षा तंत्र की सतर्कता और खुफिया समन्वय को फिर साबित किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba से जुड़े कुख्यात आरोपी शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया है। वह कथित तौर पर ‘मेट्रो पोस्टर केस’ का मुख्य संचालक था और कई राज्यों में फैले नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
जांच में सामने आया है कि शब्बीर लोन लंबे समय से विदेश में बैठकर भारत में आतंकी गतिविधियों को निर्देशित कर रहा था। वह बांग्लादेश से मॉड्यूल को कंट्रोल कर रहा था और देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय सहयोगियों के संपर्क में था। पहचान छिपाने के लिए आरोपी ने कई फर्जी नामों का इस्तेमाल किया। कभी वह ‘राजू’ बनकर तो कभी ‘जफर सिद्दीकी’ के नाम से घूमता रहा और आम लोगों के बीच घुलने-मिलने के लिए फेरीवाले का रूप अपनाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह शॉल बेचने के बहाने दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कोलकाता, गोवा, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में घूमता रहा और इसी दौरान उसने अपना नेटवर्क तैयार किया। शब्बीर का आतंकी कनेक्शन पुराना बताया जा रहा है। उसे साल 2007 में दिल्ली में हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था, जहां वह एक बड़े हमले की साजिश रच रहा था। करीब 12 साल जेल में बिताने के बाद 2019 में रिहा होते ही वह देश छोड़कर फरार हो गया था।
हाल ही में दिल्ली के कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर लगे धमकी भरे पोस्टरों की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद शब्बीर लोन का नाम सामने आया, जो इस मॉड्यूल का मुख्य हैंडलर था। सुरक्षा एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी कश्मीर घाटी में नए मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश में था। जम्मू-कश्मीर में की गई छापेमारी के दौरान कई डिजिटल सबूत और संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है।
पूछताछ में यह संकेत भी मिले हैं कि विदेशी ठिकानों से संचालित आतंकी नेटवर्क भारत में भर्ती और विस्तार की कोशिश में जुटे हैं। शब्बीर लोन इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। करीब सात साल बाद हुई इस गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल एक सक्रिय नेटवर्क कमजोर होगा, बल्कि आगे की जांच में और बड़े खुलासे भी हो सकते हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
