नकली पनीर का काला कारोबार बेनकाब: 825 किलो नकली पनीर जब्त, 45 दुकानों पर छापों से खुली खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल
हैदराबाद: हैदराबाद में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। शहर में बड़े पैमाने पर कथित तौर पर नकली और मिलावटी पनीर बेचे जाने का मामला उजागर होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर लोगों की थाली तक पहुंच रहे खाद्य पदार्थों की निगरानी कितनी प्रभावी है। कमिश्नर टास्क फोर्स की कार्रवाई में 825 किलोग्राम नकली पनीर जब्त किया है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ मिलावटखोरी के नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है।
जांच के दौरान पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने शहर की दर्जनों दुकानों और कई निर्माण इकाइयों की जांच की है। अधिकारियों को संदेह है कि कुछ कारोबारी असली पनीर की जगह कम लागत वाले विकल्पों को पनीर बताकर बेच रहे थे। आरोप है कि उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग और भ्रामक लेबलिंग के जरिए बाजार में उतारा जा रहा था, जिससे उपभोक्ताओं के लिए असली और नकली उत्पाद में फर्क करना मुश्किल हो रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ कारोबारी कम कीमत पर सामग्री खरीदकर उसे प्रीमियम उत्पाद के रूप में बेच रहे थे। इससे उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों में गुणवत्ता से समझौता लंबे समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
कार्रवाई के दौरान कई ऐसी इकाइयों की भी जांच हुई जहां कथित तौर पर आवश्यक मानकों और स्वच्छता नियमों के पालन को लेकर सवाल सामने आए। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों और लाइसेंस की भी जांच शुरू की है। यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि बाजार में बिक रहे खाद्य उत्पादों की नियमित निगरानी और जांच कितनी जरूरी है ?
जब्त किए गए नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपभोक्ता किसी भी डेयरी उत्पाद को खरीदते समय पैकेजिंग, निर्माता की जानकारी, लाइसेंस विवरण और एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें।
