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जल संकट की आहट:-जेवरा में गूंजा ‘मोर गांव मोर पानी’ का संकल्प;
कलेक्टर ने चेताया, 60 से 200 फीट पर पहुंचा जलस्तर, अब नहीं संभले तो प्यासी रहेगी अगली पीढ़ी

देवेश शर्मा सीपत
राष्ट्रीय जगत विजन/सीपत। बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के अंतिम छोर में बसे गांव जेवरा में जल संरक्षण की प्रति जागरूक करने के लिए प्रशासनिक अमले ने कार्यक्रम रखा। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने ग्रामीणों को जल की महत्ता बताते हुए भविष्य के संकट के प्रति आगाह किया। इस दौरान ग्रामीणों ने न केवल जल रक्षा का संकल्प लिया, बल्कि पारंपरिक सुआ नृत्य के माध्यम से गांव में उच्च शिक्षा की मांग भी शासन के समक्ष रखी।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण वाटर हीरो के नाम से विख्यात नीरज वानखेड़े रहे। उन्होंने वैज्ञानिक मॉडल के माध्यम से ग्रामीणों को भू-जल रिचार्जिंग की तकनीक समझाई। वानखेड़े ने बताया कि कैसे वर्षा जल संचयन, खेत तालाब और सोख्ता गड्ढों के जरिए गिरते भू-जल स्तर को रोका जा सकता है। उन्होंने मिट्टी के कटाव को रोकने और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए इसे एक जन आंदोलन बनाने की अपील की।
आंकड़ों की जुबानी, संकट की कहानी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने गिरते जलस्तर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जेवरा जैसे गांवों में पहले मात्र 60 फीट पर पानी उपलब्ध था, जो अब घटकर 200 फीट से नीचे चला गया है। धान की खेती में अत्यधिक पानी की खपत होती है। एक हेक्टेयर धान के लिए लगभग 1 करोड़ लीटर पानी खर्च होता है। किसानों को अब कम पानी वाली फसलों की ओर मुडऩा होगा। यदि वर्तमान पीढ़ी ने जल संचयन नहीं किया, तो आने वाली पीढय़िों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा।
कलेक्टर ने किसानों से गौवंश के लिए पैरादान करने और पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने साइबर ठगी से बचने के लिए ग्रामीणों को डिजिटल सुरक्षा के टिप्स भी दिए।
जनभागीदारी से ही सफल होगा मिशन: सीईओ
जिला पंचायत सीईओ संदीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनमें जनभागीदारी हो। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर स्टॉप डैम और छोटे तालाबों के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी बजट से जल संरक्षण संभव नहीं है, इसके लिए हर घर को पानी की बचत की जिम्मेदारी लेनी होगी। कार्यक्रम में उस समय एक अलग रंग देखने को मिला जब महिला पंचों ने पारंपरिक वेशभूषा में सुआ नृत्य पेश किया। इन गीतों के माध्यम से महिलाओं ने भावपूर्ण तरीके से जेवरा में कॉलेज खोलने की मांग रखी। स्कूली छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने भी उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अतिक्रमण पर अपनाए सख्ती
कार्यक्रम के पश्चात कलेक्टर ने स्कूल परिसर के पीछे स्थित विवादित भूमि का निरीक्षण किया। युवक द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण की शिकायत पर कलेक्टर ने एसडीएम मस्तूरी प्रवेश पैकरा और तहसीलदार सोनू अग्रवाल से विस्तृत जानकारी मांगी। इस भूमि को सुरक्षित रखना अनिवार्य है क्योंकि भविष्य में यहां एकलव्य विद्यालय या महाविद्यालय खुलने की प्रबल संभावना है। सार्वजनिक संपत्तियों पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ये रहें शामिल
इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष सरस्वती सोनवानी, ट्रेनी आईएएस अरविंद कुमार टी, आदिवासी नेता देव सिंह पोर्ते, सरपंच मूलचंद पटेल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रणव शर्मा और स्वागत भाषण प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल द्वारा दिया गया।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
